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Delhi News: जेएनयू में वाहनों की टक्कर से दो भारतीय पॉर्क्यूपाइन और एक गोल्डन जैकाल मरा
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एनिमल वेलफेयर सोसाइटी ने सुरक्षा विभाग को परिसर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में वाहनों की टक्कर से दो भारतीय पॉर्क्यूपाइन और एक गोल्डन जैकाल (सियार) मर गया। परिसर में जगह-जगह स्पीड ब्रेकर लगे हुए हैं, उसके बावजूद तेज वाहन दौड़ाए जाते हैं। यह घटना पिछले हफ्ते की है।
सूत्र ने बताया कि जेएनयू परिसर में 100-150 की तादाद में पॉर्क्यूपाइन हैं। यह एक ऐसा अनोखा जानवर है जिसके शरीर पर नुकीले कांटे होते हैं। यह कांटे ही इसकी रक्षा करते हैं। खतरा महसूस होने पर यह अपने कांटों को खड़ा कर लेता है। रात में ही यह अपने बिल से बाहर निकलता है। पॉर्क्यूपाइन को सेह भी कहते हैं। ज्यादातर यह जीव सेंट्रल लाइब्रेरी, पूर्वांचल और ब्रह्मपुत्र हॉस्टल के आस-पास देखने को मिलता है, जबकि करीब 300 सियार मौजूद हैं। रात के समय वाहनों की टक्कर से तीन वन्यजीवों के मरने की पुष्टि जेएनयू की एनिमल वेलफेयर सोसाइटी ने की है। इस संबंध में सोसाइटी ने सुरक्षा विभाग को परिसर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं जिससे ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
85 फीसदी हरित क्षेत्र में रहते हैं कई जीव
जेएनयू परिसर एक हजार से अधिक एकड़ में फैला है। इसमें 85 फीसदी हिस्सा हरित क्षेत्र का है। जेएनयू में करीब 100-150 नील गाय, मॉनिटर लिजार्ड, विभिन्न किस्म के सांप, 29 से ज्यादा प्रजाति की तितलियां, 200-300 मोर, 300-400 बिल्लियां और कुत्ते भी मौजूद हैं। कॉमन पाम सिवेट, स्मॉल इंडियन सिवेट सहित कई दूसरे जीव भी परिसर में रहते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में वाहनों की टक्कर से दो भारतीय पॉर्क्यूपाइन और एक गोल्डन जैकाल (सियार) मर गया। परिसर में जगह-जगह स्पीड ब्रेकर लगे हुए हैं, उसके बावजूद तेज वाहन दौड़ाए जाते हैं। यह घटना पिछले हफ्ते की है।
सूत्र ने बताया कि जेएनयू परिसर में 100-150 की तादाद में पॉर्क्यूपाइन हैं। यह एक ऐसा अनोखा जानवर है जिसके शरीर पर नुकीले कांटे होते हैं। यह कांटे ही इसकी रक्षा करते हैं। खतरा महसूस होने पर यह अपने कांटों को खड़ा कर लेता है। रात में ही यह अपने बिल से बाहर निकलता है। पॉर्क्यूपाइन को सेह भी कहते हैं। ज्यादातर यह जीव सेंट्रल लाइब्रेरी, पूर्वांचल और ब्रह्मपुत्र हॉस्टल के आस-पास देखने को मिलता है, जबकि करीब 300 सियार मौजूद हैं। रात के समय वाहनों की टक्कर से तीन वन्यजीवों के मरने की पुष्टि जेएनयू की एनिमल वेलफेयर सोसाइटी ने की है। इस संबंध में सोसाइटी ने सुरक्षा विभाग को परिसर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं जिससे ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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85 फीसदी हरित क्षेत्र में रहते हैं कई जीव
जेएनयू परिसर एक हजार से अधिक एकड़ में फैला है। इसमें 85 फीसदी हिस्सा हरित क्षेत्र का है। जेएनयू में करीब 100-150 नील गाय, मॉनिटर लिजार्ड, विभिन्न किस्म के सांप, 29 से ज्यादा प्रजाति की तितलियां, 200-300 मोर, 300-400 बिल्लियां और कुत्ते भी मौजूद हैं। कॉमन पाम सिवेट, स्मॉल इंडियन सिवेट सहित कई दूसरे जीव भी परिसर में रहते हैं।
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