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Delhi News: भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास का पुनर्निर्माण परियोजना शुरू
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मिरांडा हाउस और केएमटी में इस पहल का उद्देश्य परिवार और समुदाय के इतिहास को संरक्षित करना है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस और किश्वर मेमोरियल ट्रस्ट (केएमटी) ने मिलकर शनिवार को भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास का पुनर्निर्माण नाम की अनूठी शैक्षणिक परियोजना की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य देश के इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से मुक्त कर, परिवार और समुदाय के इतिहास को संरक्षित करना है। यह परियोजना केएमटी की ओर से पूरी तरह वित्तपोषित है। वहीं, इस परियोजना की नींव मिरांडा हाउस की पूर्व छात्रा प्रो. मधु किश्वर ने अपने माता-पिता शकुंतला किश्वर और केएल किश्वर की स्मृति में रखी थी। प्रो किश्वर ने कहा, परियोजना देश की सांस्कृतिक जड़ों को पुनर्जन्म करने और प्रामाणिक राष्ट्रीय इतिहास को रचने का एक प्रयास है। मिरांडा हाउस की प्राचार्य प्रो. बिजयालक्ष्मी नंदा ने इसे देशभर के विद्वानों के लिए ऐतिहासिक शोध का सुनहरा अवसर बताया है।
परियोजना के तहत वार्षिक निबंध प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें प्रतिभागी दो विषयों मेरे परिवार और समुदाय का इतिहास और मेरे गांव, नगर या शहर का इतिहास पर न्यूनतम पांच हजार शब्दों का शोध-निबंध प्रस्तुत कर सकेंगे। निबंधों का मूल्यांकन देश के ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक अनुसंधान के विशेषज्ञों की समिति की ओर से किया जाएगा। 200 प्रतिभागी, जिसमें छात्र-छात्राएं और संकाय सदस्य शामिल हुए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस और किश्वर मेमोरियल ट्रस्ट (केएमटी) ने मिलकर शनिवार को भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास का पुनर्निर्माण नाम की अनूठी शैक्षणिक परियोजना की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य देश के इतिहास को औपनिवेशिक दृष्टिकोण से मुक्त कर, परिवार और समुदाय के इतिहास को संरक्षित करना है। यह परियोजना केएमटी की ओर से पूरी तरह वित्तपोषित है। वहीं, इस परियोजना की नींव मिरांडा हाउस की पूर्व छात्रा प्रो. मधु किश्वर ने अपने माता-पिता शकुंतला किश्वर और केएल किश्वर की स्मृति में रखी थी। प्रो किश्वर ने कहा, परियोजना देश की सांस्कृतिक जड़ों को पुनर्जन्म करने और प्रामाणिक राष्ट्रीय इतिहास को रचने का एक प्रयास है। मिरांडा हाउस की प्राचार्य प्रो. बिजयालक्ष्मी नंदा ने इसे देशभर के विद्वानों के लिए ऐतिहासिक शोध का सुनहरा अवसर बताया है।
परियोजना के तहत वार्षिक निबंध प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें प्रतिभागी दो विषयों मेरे परिवार और समुदाय का इतिहास और मेरे गांव, नगर या शहर का इतिहास पर न्यूनतम पांच हजार शब्दों का शोध-निबंध प्रस्तुत कर सकेंगे। निबंधों का मूल्यांकन देश के ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक अनुसंधान के विशेषज्ञों की समिति की ओर से किया जाएगा। 200 प्रतिभागी, जिसमें छात्र-छात्राएं और संकाय सदस्य शामिल हुए।
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