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केरल में डूबे छात्रों के घर मातम
New Delhi
Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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नई दिल्ली। मोहम्मद दिलशान देश के लिए कुछ करना चाहता था। पढ़ने-लिखने के साथ अन्य गतिविधियों में उसकी खासी रुचि थी। यह कहना है दिलशान के मामा वसीम अहमद का। उन्होंने कहा कि दिलशान की जिन हालात में मौत हुई है, उसने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है। वसीम देर रात दिलशान के शव को लेकर बुलंदशहर रवाना हो गए।
बृहस्पतिवार दोपहर ढाई बजे इंडियन एयरफोर्स के एक विमान से एनसीसी के पांचों कैडेट के शवों को दिल्ली लाया गया। केरल के मलायातूर इलाके में पेरियार नदी में डूबने से इनकी मौत हो गई थी। सभी एनसीसी कैडेट पर्वतारोही कैंप में गए थे। पालम एयरपोर्ट पर सभी छात्रों के परिवार वाले मौजूद थे। सभी अपने बच्चों के शवों को लेकर घर रवाना हो गए।
दिलशान के मामा वसीम ने बताया कि दिलशान की मौत की खबर मिलने के बाद से पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। ऐसा ही कुछ हाल मटिया महल इलाके में रहने वाले गुलवेज अहमद के परिवार का है। बेटे की मौत से आहत परिवार का कोई भी सदस्य कुछ नहीं कह पा रहा है। परिवार वालों का कहना है कि होनी को कौन टाल सकता है।
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घटना का शिकार हुए मोहम्मद दिलशान और तबीश बकरी जामिया में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, जबकि इरशाद आलम सिविल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष का छात्र था। वहीं, गुलवेज अहमद नामक छात्र शहीद भगत सिंह कॉलेज में बीकॉम पास का तीसरे वर्ष का छात्र था। हेमंत सीनियर सेकेंडरी बाल विद्यालय कालकाजी स्थित एक स्कूल में पढ़ता था।
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बृहस्पतिवार दोपहर ढाई बजे इंडियन एयरफोर्स के एक विमान से एनसीसी के पांचों कैडेट के शवों को दिल्ली लाया गया। केरल के मलायातूर इलाके में पेरियार नदी में डूबने से इनकी मौत हो गई थी। सभी एनसीसी कैडेट पर्वतारोही कैंप में गए थे। पालम एयरपोर्ट पर सभी छात्रों के परिवार वाले मौजूद थे। सभी अपने बच्चों के शवों को लेकर घर रवाना हो गए।
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दिलशान के मामा वसीम ने बताया कि दिलशान की मौत की खबर मिलने के बाद से पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। ऐसा ही कुछ हाल मटिया महल इलाके में रहने वाले गुलवेज अहमद के परिवार का है। बेटे की मौत से आहत परिवार का कोई भी सदस्य कुछ नहीं कह पा रहा है। परिवार वालों का कहना है कि होनी को कौन टाल सकता है।
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घटना का शिकार हुए मोहम्मद दिलशान और तबीश बकरी जामिया में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, जबकि इरशाद आलम सिविल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष का छात्र था। वहीं, गुलवेज अहमद नामक छात्र शहीद भगत सिंह कॉलेज में बीकॉम पास का तीसरे वर्ष का छात्र था। हेमंत सीनियर सेकेंडरी बाल विद्यालय कालकाजी स्थित एक स्कूल में पढ़ता था।