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आबोहवा खराब कर रहीं फैक्ट्रियों पर होगी कार्रवाई
New Delhi
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। राजधानी के स्मॉग पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की अथॉरिटी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। शनिवार को बुलाई गई बैठक के दौरान ईपीसीए ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के अधिकारियों को प्रदूषण पर नियंत्रण करने का सख्त निर्देश दिया। यही नहीं, इस दिशा में संबंधित सरकारों की तरफ से उठाए गए कदमों की साप्ताहिक निगरानी की जाएगी। पहली बैठक में पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अथॉरिटी (ईपीसीए) के अध्यक्ष भूरेलाल व उत्तर प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली के पर्यावरण व परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इसमें गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव के शहरों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों व गैर-कानूनी तरीके से चल रहे जनरेटर संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, बॉर्डर की सभी मुख्य सड़कों के एंट्री प्वाइंट पर दोनों तरफ के अधिकारी वाहनों की जांच करेंगे। इस दौरान मानक से ज्यादा प्रदूषण करने वाले वाहनों की राजधानी में एंट्री बंद की जाए।
दूसरी बैठक में पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के पर्यावरण विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद थे। इसमें खासतौर से पंजाब व हरियाणा में कृषि फसलों के जलाकर नष्ट करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसमें राज्यों को निर्देश दिया गया कि वायु प्रदूषण कानून के तहत इसे गैर-कानूनी घोषित किया जाए। वहीं किसानों को ऐसा करने से रोका जाए। इसकी जगह मिट्टी में दबाकर गलाने के साथ फसलों के निपटान के लिए नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए। जरूरी हो तो इसके लिए सब्सिडी भी दी जा सकती है। ईपीसीए ने यह भी साफ किया कि उसकी निगरानी में संबंधित निर्देशों की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी ताकि प्रदूषण स्तर में कमी लाई जा सके। बता दें मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रदूषण पर चिंता जताई थी, वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से इस संबंध में मुलाकात करेंगी। इसके साथ ही शुक्रवार को दिल्ली सरकार ने ऐलान किया कि राजधानी में कूड़ा जलाने वालों को दंडित किया जाएगा।
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दूसरी बैठक में पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के पर्यावरण विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद थे। इसमें खासतौर से पंजाब व हरियाणा में कृषि फसलों के जलाकर नष्ट करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसमें राज्यों को निर्देश दिया गया कि वायु प्रदूषण कानून के तहत इसे गैर-कानूनी घोषित किया जाए। वहीं किसानों को ऐसा करने से रोका जाए। इसकी जगह मिट्टी में दबाकर गलाने के साथ फसलों के निपटान के लिए नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए। जरूरी हो तो इसके लिए सब्सिडी भी दी जा सकती है। ईपीसीए ने यह भी साफ किया कि उसकी निगरानी में संबंधित निर्देशों की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी ताकि प्रदूषण स्तर में कमी लाई जा सके। बता दें मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्रदूषण पर चिंता जताई थी, वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से इस संबंध में मुलाकात करेंगी। इसके साथ ही शुक्रवार को दिल्ली सरकार ने ऐलान किया कि राजधानी में कूड़ा जलाने वालों को दंडित किया जाएगा।
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