{"_id":"5f25b4e88ebc3e63dc76588d","slug":"high-court-issues-notice-to-school-for-not-allowing-studets-for-non-payment-of-fee-ashram-news-noi527224742","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो छात्रों की ऑनलाइन क्लासेस बंद करने पर निजी स्कूल तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो छात्रों की ऑनलाइन क्लासेस बंद करने पर निजी स्कूल तलब
विज्ञापन
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने फीस न भरने पर दो छात्रों की ऑनलाइन क्लासेस बंद करने वाले निजी स्कूल के प्रिंसिपल और चेयरमैन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सात अगस्त को दोनों को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने इस याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की। पीठ ने कहा कि आदेश का अनुपालन न करने पर स्कूल के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की गई? पीठ ने स्कूल के प्रिंसिपल और चेयरमैन को नोटिस जारी करके पूछा कि दोनों बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस से क्यों रोका गया जबकि अदालत ने उन्हें शामिल करने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता बच्चों के पिता ने पीठ से कहा कि वह अपने बच्चों की फीस ऑनलाइन भी नहीं भर सके क्योंकि अप्रैल से जून तक फीस न भरने पर स्कूल के पोर्टल पर उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। उनका आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें फीस ऑनलाइन भरने की अनुमति स्कूल ने नहीं दी। स्कूल ने छात्रों की परीक्षाएं भी करवाई हैं, लेकिन उनके बच्चों को इससे से वंचित रखा गया।
विज्ञापन
इस पर पीठ ने स्कूल से कहा कि वह तत्काल अदालत के आदेश का अनुपालन करे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्कूल को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता पिता को उनके बच्चों की फीस ऑनलाइन भरने के लिए स्कूल पोर्टल पर तत्काल प्रवेश दिया जाए ताकि बच्चे ऑनलाइन क्लासेस में शामिल हो सकें।
पीठ ने याचिकाकर्ता को फीस ऑनलाइन जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया था कि इस दौरान छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस में शामिल होने से नहीं रोका जाना चाहिए। पीठ ने कहा था स्कूल की ओर से ऑनलाइन जो भी गतिविधियां करवाई जा रही हैं, उनसे भी बच्चों को वंचित न रखा जाए। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि बच्चों का करियर सर्वोपरि है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने इस याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई की। पीठ ने कहा कि आदेश का अनुपालन न करने पर स्कूल के खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की गई? पीठ ने स्कूल के प्रिंसिपल और चेयरमैन को नोटिस जारी करके पूछा कि दोनों बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस से क्यों रोका गया जबकि अदालत ने उन्हें शामिल करने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता बच्चों के पिता ने पीठ से कहा कि वह अपने बच्चों की फीस ऑनलाइन भी नहीं भर सके क्योंकि अप्रैल से जून तक फीस न भरने पर स्कूल के पोर्टल पर उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। उनका आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें फीस ऑनलाइन भरने की अनुमति स्कूल ने नहीं दी। स्कूल ने छात्रों की परीक्षाएं भी करवाई हैं, लेकिन उनके बच्चों को इससे से वंचित रखा गया।
विज्ञापन
इस पर पीठ ने स्कूल से कहा कि वह तत्काल अदालत के आदेश का अनुपालन करे। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्कूल को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता पिता को उनके बच्चों की फीस ऑनलाइन भरने के लिए स्कूल पोर्टल पर तत्काल प्रवेश दिया जाए ताकि बच्चे ऑनलाइन क्लासेस में शामिल हो सकें।
पीठ ने याचिकाकर्ता को फीस ऑनलाइन जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया था कि इस दौरान छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस में शामिल होने से नहीं रोका जाना चाहिए। पीठ ने कहा था स्कूल की ओर से ऑनलाइन जो भी गतिविधियां करवाई जा रही हैं, उनसे भी बच्चों को वंचित न रखा जाए। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि बच्चों का करियर सर्वोपरि है।