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चिंता: कोरोना से संक्रमित हर पांचवां मरीज मानसिक समस्याओं से पीड़ित, डॉक्टर भी हुए थे इस परेशानी का शिकार

Wed, 15 Sep 2021 01:32 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 15 Sep 2021 01:32 AM IST
सार

कोरोना से संक्रमित हर पांचवां मरीज मानसिक समस्याओं से पीड़ित है। इसकी जानकारी एम्स में भर्ती हुए मरीजों के आधार पर अस्पताल ने दी है। पांच फीसदी मरीजों का दवाओं के माध्यम से इलाज भी हुआ है। इस परेशानी का शिकार डॉक्टर भी हुए थे 

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Every fifth patient infected with corona suffers from mental problems The hospital has given information on the basis of patients admitted in AIIMS
फाइल फोटो - फोटो : iStock

विस्तार

एम्स में भर्ती हुए कोरोना मरीजों में से 20 फीसदी मानसिक समस्याओं का शिकार हुए थे। वहीं, पांच प्रतिशत रोगी ऐसे भी थे जिनमें गंभीर लक्षण देखे गए थे। इन मरीजों का मानसिक रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के माध्मय से इलाज किया गया था। 
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एम्स के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से मंगलवार को यह जानकारी साझा की गई है। अस्पताल में तीन दिव्सीय विश्व सामाजिक मनोचिकित्सा सम्मेलन शुरू हुआ है। इसमें मानसिक समस्याओं से जुड़े शोध और उनके आंकड़े जारी किए जाएंगे।
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एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आर.के चड्ढ़ा ने ने कहा कि मानसिक बीमारियों को लेकर लोगों में गलत धारणा है। इसलिए वे जल्द इलाज के लिए नहीं पहुंचते। वहीं, कुछ लोग इन परेशानियों का जिक्र करने से डरते भी हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए।
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मानसिक परेशानियों का कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकों की सलाह लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस दौर में सामान्य लोगों में भी मानसिक परेशानी बढ़ी है। मरीज के परिवार के लोग भी तनाव में आए थे। इस वजह से लोगों में घबराहट व नींद नहीं आने की परेशानी देखी जाती है। 

डॉक्टर आर.के चड्ढ़ा ने ने कहा कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी कोरोना के दौरान मोरल इंजुरी के शिकार हुए लेकिन उन्हें दवाओं की जरूरत नहीं पड़ी। मोरल इंजुरी का मतलब है व्यक्ति आसपास का माहौल देखकर कुछ न कर पाने की स्थिति में अपराधबोध महसूस करता है। 

कोरोना को दूसरी लहर के दौरान कई स्वास्थ्यकर्मी ऐसा महसूस कर रहे थे कि वे सभी मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बुरा लग रहा था। मरीज के परिवार के लोग व स्वास्थ्य कर्मी भी कोरोना के कारण तनाव में आ रहे हैं। इस वजह से लोगों में घबराहट व नींद नहीं आने की परेशानी देखी जाती है। 

डॉ. चड्ढ़ा ने कहा कि अस्पताल में भर्ती हुए 20 फीसदी कोरोना मरीजों को मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इन लोगों में अवसाद, तनाव, डर, घबराहट और बेचेनी थी। वहीं, पांच फीसदी मरीजों का दवाओें के माध्यम से भी इलाज किया गया था। मनोरोग विशषज्ञों की देखरेख में इन सभी रोगियों का इलाज किया गया था।

18 साल से अधिक उम्र के 11 फीसदी लोग शिकार
राष्ट्रीय मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में मानसिक रोगों के एक लाख मरीजों पर भी औसतन एक डॉक्टर भी मौजूद नहीं है। करीब दो लाख मरीजों पर एक डॉक्टर मौजूद है। जबकि कोरोना के कारण मानसिक बीमारियां बढ़ गई हैं। लोगों में नींद नहीं आने, तनाव, अवसाद जैसी परेशानियां देखी जा रही हैं।

सर्वे के अनुसार देश में 18 साल से अधिक उम्र वाले 11 फीसदी लोग किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी से गुजर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में मानसिक बीमारियों का प्रभाव ज्यादा है। वहीं, महिलाओं की तुलना में पुरुष मानसिक बीमारी से अधिक पीड़ित हैं। इस तरह करीब 15 करोड़ लोगों को मानसिक बीमारियों के इलाज की जरूरत है। लेकिन इनमें से ज्यादातर लोगों को इलाज नहीं मिल पाता। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं लेकिन निजी क्षेत्र, चिकित्सा संगठनों सहित सभी मिलकर काम करना होगा।

यह है समाधान
डॉ. चड्ढ़ा ने कहा कि मानसिक समस्याओं से दूर रहने के लिए सबसे जरूरी है कि लोग नियमित तौर पर कोई न कोई व्यायाम या कसरत करें। इसके साथ ही पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। लोगों को चाहिए की वह नकारात्मक चीजों से दूर रहें।
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