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डीयू एडमिशन: दाखिले के लिए बैकअप योजना तैयार करने में जुटा दिल्ली विश्वविद्यालय, 12वीं की परीक्षा टलने से तनाव में छात्र
Fri, 16 Apr 2021 07:03 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 16 Apr 2021 07:03 AM IST
सार
डीयू में दाखिले के लिए दो तरह की योजना पर काम हो रहा है। यदि 12वीं की परीक्षाएं नहीं हुई तो डीयू कॉमन एंट्रेस टेस्ट 100 फीसदी वेटेज के साथ होगा। इस तरह से दाखिले के लिए बारहवीं के अंकों की 50 फीसदी वेटेज खत्म हो सकती है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा फिलहाल स्थगित हो गई है। कोरोना महामारी की स्थिति को देखने के बाद एक जून को परीक्षा के संबंध में फैसला होगा। ऐसे में परीक्षा होगी या नहीं इसका असर डीयू की दाखिला प्रक्रिया और होने वाले एंट्रेस पर भी पड़ सकता है। डीयू में दाखिले के लिए दो तरह की योजना पर काम हो रहा है। यदि 12वीं की परीक्षाएं नहीं हुई तो डीयू कॉमन एंट्रेस टेस्ट 100 फीसदी वेटेज के साथ होगा। इस तरह से दाखिले के लिए बारहवीं के अंकों की 50 फीसदी वेटेज खत्म हो सकती है।
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सीबीएसई की परीक्षा तिथियों को टाला गया है। ऐसे में डीयू की दाखिला प्रक्रिया शुरु होने में भी देरी हो सकती है। दाखिले कब शुरु होंगे यह काफी कुछ निर्भर सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा ओर उसकेरिजल्ट पर निर्भर करेगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए सबसे अधिक आवेदन सीबीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों के ही आते हैं।
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डीयू की ओर से एक बैकअप प्लॉन बनाने की तैयारी शुरु की गई है। उस प्लॉन के अनुसार यदि सीबीएसई की परीक्षा देशभर में किसी एक राज्य में भी नहीं होती, तब कॉमन एंट्रेस टेस्ट के लिए 100 फीसदी अंक तय किए जाएंगे। इस तरह से बारहवीं के अंकों की वेटेज नहीं शामिल की जाएगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में इस बार अंडर ग्रेजुएट स्तर के सभी विषयों में दाखिले प्रवेश परीक्षा से करने की तैयारी की जा रही है। प्रवेश परीक्षा केलिए नेशनल टेस्टिंग एंजेसी की ओर से सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट(सीयूसेट) आयोजित किया जाएगा। इसमें टेस्ट केअंक और बारहवीं के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार करने की योजना बनाई गई है।
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वहीं बोर्ड परीक्षा टलने से दाखिले के एंट्रेस को लेकर भी असमंजस है। यदि परीक्षा देरी से होती है तो एंट्रेस पर भी असर पड़ेगा। यदि 12वीं की परीक्षा जून में होती है तो एंट्रेस जून में होना मुश्किल होगा। वहीं बारहवीं के बाद काफी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में भी पढने जाते हैं, ऐसे में यदि परीक्षा देरी से होगी तो विदेशों में भी दाखिला लेना मुश्किल हो सकता है।
12वीं की परीक्षा टलने से तनाव में छात्र
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं स्थगित हो चुकी है। जून में परीक्षा केहोने को लेकर काफी अनिश्चितता है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस अनिश्चितता के कारण बच्चों में तनाव की स्थिति लंबी होती जा रही है। दरअसल बारहवीं की परीक्षा टलने के साथ ही अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी अनिश्चितता है। इससे बच्चे केमानसिक स्वास्थय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह परिणाम कुछ बच्चों में लघुकालिक तो कुछ बच्चों में दीर्घकालिक हो सकते हैं। परीक्षा को लेकर तिथि मिलनी चाहिए थी
दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक डॉ नवीन कुमार कहते हैं कि कोरोना संक्रमण के बढने के कारण बारहवीं की परीक्षा टल गई हैं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (नीट, जेईई, क्लैट समेत अन्य) को लेकर भी अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वह होगी या नहीं। बारहवीं की परीक्षा को लेकर भी स्पष्टता नहीं है कि होगी, नहीं होगी या कैसे होगी, क्योंकि एक जून को समीक्षा के बाद परीक्षा को लेकर फैसला होना है। ऐसे में यह लगभग डेढ़ महीना बच्चे के मन-मस्तिष्क केलिए काफी तनाव भरा रहेगा।
इससे बच्चों के लिए ऐसी अनिश्चितता बन गई है जिससे उसे झेलना पड़ रहा है। वह कहते हैं कि बारहवीं में जो बच्चे हैं उनकी किशोरावस्था वाली स्टेज है, यह टर्निग प्वाइंट वाली स्थिति होती है। पहले से ही बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर एक दबाव झेल रहे हैं इससे वह पहले से तनाव में हैं, अब और तनाव बढ़ेगा। इस तरह से अनिश्चितता के कारण बच्चे के तनाव की स्थिति लंबी होती जा रही है। वहीं अभिभावक भी अनावश्यक रुप से दबाव बनाते हैं। हर तरफ से आ रहे दबाव के कारण बच्चों में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनने के लिए मानसिक स्वास्थय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। परीक्षा के लिए एक तिथि तय करके दी जानी चाहिए थी।