प्लाज्मा थेरैपी का दायरा बढ़ा, अब 200 मरीजों पर होगा परीक्षण
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दिल्ली सरकार प्लाज्मा थेरेपी का दायरा बढ़ाने जा रही है। एलएनजेपी के साथ अब राजीव गांधी अस्पताल में भी प्लाज्मा थेरेपी का परीक्षण किया जाएगा। दोनों सरकारी अस्पतालों में 200 मरीजों पर इसके परीक्षण की इजाजत केंद्र सरकार से मिल गई है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी इस थेरेपी से इलाज हो रहा है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को बताया कि कोरोना मरीजों की मौत रोकने की दिशा में प्लाज्मा थेरेपी काफी अहम साबित हो रही है। दिल्ली पहला राज्य है, जहां प्लाज्मा थेरेपी को बड़े उत्साह के साथ शुरू किया गया है।
दिल्ली सरकार ने शुरुआत में 29 मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया। इसके नतीजे बहुत अच्छे आए हैं। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई। इसके बाद दिल्ली सरकार को 200 और मरीजों के ऊपर प्लाज्मा थेरेपी का परीक्षण करने की इजाजत मिली है। एलएनजेपी के साथ अब राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भी प्लाज्मा थेरेपी का परीक्षण किया जाएगा। इसके साथ कई निजी अस्पतालों ने भी इस थेरेपी का परीक्षण होगा।
केजरीवाल ने बताया कि यदि कोई गंभीर मरीज है, जिसके कई अंग फेल हो चुके हैं तो उसे प्लाज्मा थेरेपी से बचा पाना मुश्किल है, लेकिन जिन लोगों की हालत अभी ज्यादा नहीं बिगड़ी है और उन्हें प्लाज्मा थेरेपी दी जाए तो उनकी हालत आगे और बिगड़ने से रोकी जा सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस थेरेपी से मौतों की संख्या कम करने में कामयाबी मिल जाएगी। एलएनजेपी के नतीजे दिखाते हैं कि जब से प्लाज्मा थेरेपी शुरू की गई है, वहां पहले जितनी मौतें होती थी, अब उसके मुकाबले करीब आधी ही हो रही हैं।
सरकार आईसीयू बेड बढ़ाने पर कर रही काम
दिल्ली सरकार आईसीयू बेड बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। शुक्रवार को दिल्ली कैबिनेट ने बुराड़ी अस्पताल में 450 बेड बढ़ाने की अनुमति दे दी। इसके अलावा बैंक्वेट हॉल में भी बेड का इंतजाम किया जा रहा है। केजरीवाल ने माना कि आने वाले समय में आईसीयू बेड की जरूरत पढ़ सकती है। यदि अचानक ज्यादा बेड की जरूरत पड़ती है तो हम उसके लिए पहले से ही तैयार हैं।
जांच बढ़ाने से बढ़ रहे मामले, लेकिन ज्यादातर को लक्षण नहीं
सीएम ने बताया कि दिल्ली में करीब 74 हजार कोरोना के केस हो चुके हैं, लेकिन अभी स्थिति काबू में है। कुछ दिन पहले तक रोजाना 5 से 6 हजार टेस्ट होते थे, तब 2 से ढाई हजार केस आ रहे थे। अब जांच की संख्या बढ़ाकर 18000 कर दी है। अब 3000-3500 केस आ रहे हैं। मतलब, जांच की तुलना में मामले कम बढ़े हैं। फिर, 74 हजार में से 45 हजार लोग ठीक हो गए हैं।
ज्यादा टेस्ट करने की वजह से केस की संख्या ज्यादा दिख रही है, लेकिन लोग ठीक भी बहुत तेजी से हो रहे हैं। फिलहाल कोरोना के करीब 26000 मरीज हैं। इसमें से केवल 6000 लोग ही अस्पताल में भर्ती हैं। बाकी लोग अपने घर पर इलाज करा रहे हैं। इनमें हल्की खांसी या बुखार है।
पिछले एक सप्ताह में कुल बेड की संख्या जिन पर मरीज अभी हैं, वह लगभग 6000 के आसपास रही है, जबकि दिल्ली में प्रतिदिन 3 से 3.5 हजार नए मरीज आ रहे हैं, लेकिन इन मरीजों को रोज नए बेड की जरूरत नहीं पड़ रही है। इसका मतलब यह है कि यह गंभीर मरीज नहीं हैं। दिल्ली में जितने लोगों को कोरोना हो रहा है, वह हल्के लक्षणों वाला हो रहा है।
पिछले एक सप्ताह से दिल्ली में बेड की जरूरत लगभग 6 हजार बनी हुई है। अभी दिल्ली में करीब 13,500 बेड तैयार हैं। इसमें से करीब 7500 बेड अभी खाली हैं और सिर्फ 6000 बेड पर ही मरीज हैं।
होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए सुरक्षा कवच है ऑक्सी पल्स मीटर
केजरीवाल ने बताया कि कोरोना के मरीज में ऑक्सीजन का स्तर अचानक कम हो जाता है। एक आम आदमी में ऑक्सीजन का स्तर 95 होना चाहिए। अगर यह 90 से कम हो जाए तो खतरा माना जाता है। 85 से कम हो जाए तो बहुत गंभीर माना जाता है। यदि ऑक्सीजन लेवल 90 या 85 हो जाए तो सांस लेने में तकलीफ होती है और बहुत ज्यादा सांस रुकती है और बहुत ज्यादा तकलीफ होती है।
सीएम ने बताया कि होम आइसोलेशन के सभी मरीजों के घरों में ऑक्सी मीटर पहुंचा दिया है। यह ऑक्सी पल्स मीटर आपका सुरक्षा कवच है। जिन लोगों को ऑक्सी मीटर मिला है वे लोग कोशिश करके हर घंटे, 2 घंटे में अपना ऑक्सीजन स्तर मापते रहें। अगर ऑक्सीजन स्तर 94 के नीचे आ जाए तो तुरंत सरकार को फोन करना है, आपातकाल में ऑक्सीजन पहुंचा दिया जाएगा। जरूरत होने पर मरीज अस्पताल में भर्ती हो सकेगा।