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रेहड़ी-पटरी की गतिविधियों पर कार्रवाई न करने पर अवमानना याचिका
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नई दिल्ली। नेहरू प्लेस के प्रतिबंधित इलाके में अदालत के आदेश के बावजूद रेहड़ी-पटरी वालों की गतिविधियों के जारी रहने पर अदालत की अवमानना याचिका दायर की गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और कई विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन सभी पर जानबूझकर आदेश की अवज्ञा करने का आरोप लगाया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 अक्तूबर तय की है।
फेडरेशन ऑफ नेहरू प्लेस एसोसिएशन ने अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में नेहरू प्लेस क्षेत्र में गतिविधियों को अंजाम देने वाले कुछ विक्रेताओं द्वारा अदालत के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने का दावा किया गया है।
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एसोसिएशन के अधिवक्ता प्रणव प्रूथी ने अदालत को बताया कि शाम को साढ़े पांच बजे तक परिसर खाली करने के लिए एक विशेष निर्देश था। वे रात 11 बजे परिसर में अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए हैं और वे अपना सामान वहीं छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि केवल 95 फेरीवालों को अदालत ने क्षेत्र में अपना व्यवसाय करने की अनुमति दी है। हालांकि तस्वीरों से पता चलता है कि संख्या बहुत अधिक है।
अदालत ने इससे पहले इस साल अगस्त में जिला व्यवसायिक केंद्र नेहरू प्लेस में एक इमारत में आग लगने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था और एक जनहित याचिका शुरू की थी।
अदालत ने कहा था कि नेहरू प्लेस क्षेत्र में फेरीवालों और विक्रेताओं के कारण होने वाली समस्या, जिसे सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से देखा जा सकता है, से पता चलता है कि दमकल गाड़ियों के लिए उस इमारत तक पहुंचना मुश्किल था जहां आग लगी थी।
अदालत ने अग्निशमन विभाग को नेहरू प्लेस इलाके में एक कार्य दिवस पर मॉक ड्रिल करने और कमियों की पहचान करने का निर्देश देते हुए कहा था कि यह सुनिश्चित करना होगा कि दमकल की पहुंच हर तरफ से हो।
अदालत ने दिल्ली पुलिस और एसडीएमसी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दैनिक आधार पर किसी भी व्यक्ति द्वारा नेहरू प्लेस, जिला व्यवसायिक केंद्र के प्रतिबंधित हॉकिंग और वेंडिंग जोन में रेहड़ी-पटरी वालों को बैठने की इजाजत न दी जाए। इसके अलावा व्यवसाय करने की उन्हें ही अनुमति दी जाए जिनके पास लाइसेंस हो।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 अक्तूबर तय की है।
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फेडरेशन ऑफ नेहरू प्लेस एसोसिएशन ने अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में नेहरू प्लेस क्षेत्र में गतिविधियों को अंजाम देने वाले कुछ विक्रेताओं द्वारा अदालत के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने का दावा किया गया है।
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एसोसिएशन के अधिवक्ता प्रणव प्रूथी ने अदालत को बताया कि शाम को साढ़े पांच बजे तक परिसर खाली करने के लिए एक विशेष निर्देश था। वे रात 11 बजे परिसर में अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए हैं और वे अपना सामान वहीं छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि केवल 95 फेरीवालों को अदालत ने क्षेत्र में अपना व्यवसाय करने की अनुमति दी है। हालांकि तस्वीरों से पता चलता है कि संख्या बहुत अधिक है।
अदालत ने इससे पहले इस साल अगस्त में जिला व्यवसायिक केंद्र नेहरू प्लेस में एक इमारत में आग लगने की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था और एक जनहित याचिका शुरू की थी।
अदालत ने कहा था कि नेहरू प्लेस क्षेत्र में फेरीवालों और विक्रेताओं के कारण होने वाली समस्या, जिसे सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से देखा जा सकता है, से पता चलता है कि दमकल गाड़ियों के लिए उस इमारत तक पहुंचना मुश्किल था जहां आग लगी थी।
अदालत ने अग्निशमन विभाग को नेहरू प्लेस इलाके में एक कार्य दिवस पर मॉक ड्रिल करने और कमियों की पहचान करने का निर्देश देते हुए कहा था कि यह सुनिश्चित करना होगा कि दमकल की पहुंच हर तरफ से हो।
अदालत ने दिल्ली पुलिस और एसडीएमसी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दैनिक आधार पर किसी भी व्यक्ति द्वारा नेहरू प्लेस, जिला व्यवसायिक केंद्र के प्रतिबंधित हॉकिंग और वेंडिंग जोन में रेहड़ी-पटरी वालों को बैठने की इजाजत न दी जाए। इसके अलावा व्यवसाय करने की उन्हें ही अनुमति दी जाए जिनके पास लाइसेंस हो।