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दिल्ली एम्स के 64 डॉक्टरों ने 24 घंटे तक की सर्जरी, जुड़वां बहनों को किया अलग

Sun, 24 May 2020 06:41 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Sun, 24 May 2020 06:41 AM IST
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64 doctors separated twins after 24 hours of surgery in AIIMS
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सीय जगत में नया रिकॉर्ड कायम किया है। 64 डॉक्टरों ने साढ़े 24 घंटे चली मैराथन सर्जरी के बाद दो जुड़वां बहनों को अलग करने में कामयाबी हासिल की है। दोनों बहनें कूल्हे से आपस में जुड़ी थीं। इनकी रीढ़ की हड्डी और पैरों की नसें भी एक थीं।

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आंत भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी। शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुई सर्जरी शनिवार सुबह 9 बजे तक चली। फिलहाल दोनों बहनें वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चियों की हालत नाजुक बनी हुई है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि दोनों बच्चियां जल्द स्वस्थ हो जाएंगी। इससे पहले दिल्ली एम्स के डॉक्टर सिर से जुड़े जग्गा और बलिया को अलग करने में कामयाब हुए हैं।
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दो वर्षीय जुड़वां बच्ची बीते डेढ़ साल से एम्स में भर्ती हैं। दोनों बच्ची कूल्हे और पेट से आपस में जुड़ी हुई हैं। यूपी के बदायूं जिला निवासी यह बच्चियां शारीरिक तौर पर जटिल ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थीं। इसलिए डॉक्टरों को सर्जरी के लिए एक लंबा वक्त लगा। साथ ही कम आयु में एनेस्थीसिया भी नहीं दिया जा सकता। ऐसे में डॉक्टरों को इनके मजबूत होने का इंतजार था।
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3डी मॉडल पर एक लंबी प्रैक्टिस के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की योजना बनाई और कोविड महामारी के इस वक्त एकजुट होकर बच्चियों को नई जिंदगी देने का प्रयास शुरू किया। शुक्रवार को यह ऑपरेशन शुरू हुआ, जो शनिवार सुबह पूरा हो सका। एम्स के बालरोग सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मीनू वाजपेयी ने ऑपरेशन सफल होने की जानकारी देते हुए फिलहाल दोनों बच्चियों के निगरानी में रहने की बात कही।

ऑपरेशन में जुटे इन विभागों के डॉक्टर
एम्स के पीडिएट्रिक्स सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडिएट्रिक्स कार्डियोलॉजी, रेडियोलॉजी, सीटीवीएस के अलावा रेजिडेंट डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ समेत 64 से ज्यादा लोगों की टीम ऑपरेशन में जुटी रही। तीन अलग-अलग टीमें आठ-आठ घंटे की शिफ्ट के लिए तैयार की गईं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान सभी को एक साथ रहना पड़ा।


इन चुनौतियों ने किया परेशान
ऑपरेशन में व्यस्त मेडिकल टीम को सबसे बड़ी चुनौती का सामना तब करना पड़ा जब दोनों बच्चियों का कूल्हा और पेट से जुड़ाव होने के अलावा उनकी रीढ़ की हड्डी और आंत आपस में जुड़े थे। पैरों की नसें दोनों की एक ही थीं, जिसकी वजह से नई नसें प्रत्यारोपित करना जरूरी हो गया। रक्त संचार भी जरूरी था। ऐसे में नई नस को एहतियात के साथ प्रत्यारोपित किया गया। अलग करने के बाद एक बच्ची को नई त्वचा देना भी चुनौती था। बच्ची की मां से टिश्यू लेकर प्रत्यारोपित किए गए।

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