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युवराज हत्याकांड: 'पत्नी बेचो, कुछ भी करो, बस...', फर्जी नोटिस से करोड़ों का खेल; मैनेजर के कत्ल में नया मोड़

Mon, 21 Sep 2026 12:49 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 21 Sep 2026 12:49 PM IST
सार

दिल्ली के रहने वाले युवराज सिंह मनचंदा की हत्या की जांच में नया खुलासा हुआ है। आरोपी आन्या वत्स और संयम सचदेवा को लेकर नई जानकारी सामने आई है। पुलिस उनके 1.2 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामलों की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही लगभग चार करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद भी जांच के दायरे में है।

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Yuvraj Singh Manchanda murder case Fraud cases Rs 4-crore property dispute under lens in Delhi
Yuvraj Singh Manchanda - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

गुरुग्राम की अडानी रियल्टी कंपनी में मैनेजर दिल्ली निवासी युवराज सिंह मनचंदा की हत्या की जांच जारी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उन्हें मरने से पहले जानकारी थी। यह जानकारी उनके पूर्व सहयोगियों अन्या वत्स और संयम सचदेवा से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और विवादों के बारे में थी। 
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जांच में धोखाधड़ी का एक मामला भी सामने आया है। इसके साथ ही लगभग चार करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद भी जांच के दायरे में है। पुलिस ने अभी तक इन मामलों और मनचंदा की कथित हत्या के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया है।
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सूत्रों के मुताबिक, जांच में धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। इसमें एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाया गया। उसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय गृह मंत्रालय के नोटिस की धमकी दी गई थी। इस धोखाधड़ी में 1.2 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ। 
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शिकायतकर्ता को भेजा गया था ED का कथित नोटिस
यह मामला अगस्त में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। यह शिकायत उस वरिष्ठ अधिकारी ने दर्ज कराई थी, जो संयम सचदेवा का स्कूल का साथी था। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता को कथित तौर पर सितंबर 2024 से निशाना बनाया गया। उसे ED का कथित नोटिस भेजा गया था। 


 
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सचदेवा और आन्या वत्स ने कथित तौर पर उससे कहा कि उनके ऊंचे सरकारी अधिकारियों से संबंध हैं। उन्होंने मामले को सुलझाने में मदद करने का आश्वासन दिया था। अधिकारियों ने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम से जारी किए गए नकली नोटिस का इस्तेमाल किया। 
 

उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) जैसे कानूनों के तहत कथित मामलों का हवाला दिया। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) का भी जिक्र किया गया। इन मामलों की जांच आरोपियों की पृष्ठभूमि और उनके वित्तीय लेन-देन की प्रकृति का पता लगाने के लिए की जा रही है।

धोखाधड़ी और जबरन वसूली के आरोप
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने मुख्य रूप से आन्या वत्स के बैंक खाते में 1.2 करोड़ रुपये से ज़्यादा ट्रांसफर किए। इसके लिए उसने अपनी निजी बचत का इस्तेमाल करने के साथ ही कर्ज भी लिया था। परिवार के सदस्यों से उधार लेकर भी पैसे का इंतजाम किया गया था। 

 

आरोप है कि बाद में वत्स ने 26 करोड़ रुपये और मांगे। उसने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से सरकारी एजेंसियों को 13.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्राथमिकी में शिकायतकर्ता को भेजे गए एक कथित संदेश का भी जिक्र है। 

इस संदेश में उस पर एक निश्चित समय-सीमा से पहले पैसे देने का दबाव डाला गया था। संदेश में लिखा था "अपनी पत्नी को बेच दो/कुछ भी करो, बस यह पैसा चुका दो।" सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या युवराज सिंह मनचंदा को इन कथित गतिविधियों के बारे में पता था। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसका उनकी मौत की परिस्थितियों से कोई संबंध हो सकता है।

संपत्ति विवाद और पूर्व व्यावसायिक संबंध
जांचकर्ता एक और मामले की जांच कर रहे हैं, जो ग्रेटर नोएडा में लगभग चार करोड़ रुपये की संपत्ति के विवाद से जुड़ा है। इस विवाद में सचदेवा की अलग रह रही पत्नी, अन्या वत्स और संयम सचदेवा शामिल हैं। सचदेवा की अलग रह रही पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत भी दर्ज कराई थी। 

मनचंदा, वत्स और सचदेवा पहले एक अचल संपत्ति फर्म में साथ काम करते थे। पुलिस के अनुसार, बाद में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते वत्स को कंपनी से निकाल दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि वत्स को सचदेवा के साथ मनचंदा की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। 

 

उसने जांचकर्ताओं को बताया है कि उसने एक अचल संपत्ति कारोबारी को लगभग एक करोड़ रुपये दिए थे। वह पैसा उसे वापस नहीं मिला था। पुलिस इस दावे और लेन-देन की प्रकृति की पुष्टि कर रही है। साथ ही, यह भी जांच रही है कि क्या यह पैसा मामले में जांच की जा रही किसी वित्तीय विवाद या कथित अनियमितता से जुड़ा था।

शव को ठिकाने लगाने की घटनाक्रम
जांचकर्ताओं के अनुसार, जिस एसयूवी का इस्तेमाल कथित तौर पर मनचंदा की लाश को ले जाने के लिए किया गया था। उसे 6 सितंबर को उस रिहायशी सोसाइटी में ले जाया गया था। यह वही दिन था जब मनचंदा लापता हुए थे। वत्स उसी सोसाइटी में रहती थी। सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि अगले दिन गाड़ी को सोसाइटी से बाहर निकाला गया। 
 

उसे रिहायशी परिसर के पास एक जगह पर पार्क किया गया था। गाड़ी आठ सितंबर तक वहीं खड़ी रही। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर आठ सितंबर को मनचंदा की लाश फेंक दी। यह लाश गुरुग्राम के बादशाहपुर पुलिस स्टेशन इलाके में एक नाले में फेंकी गई थी। अगले दिन आरोपी शहर से भाग गए थे।

 

परिवार के आरोप और आगे की जांच
युवराज सिंह मनचंदा की लाश 10 सितंबर को मिली थी। उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें लाश मिलने के बारे में सूचित नहीं किया गया था। अज्ञात लाश का अंतिम संस्कार 14 सितंबर को कर दिया गया था। गुरुग्राम पुलिस ने शव परीक्षण कराया था। 

 

अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि गुरुग्राम पुलिस जल्द ही अपनी रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंप देगी। हत्या की जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज भी दिल्ली पुलिस को सौंपे जाएंगे। इन दस्तावेज से जांचकर्ताओं को मनचंदा की मौत का कारण पता लगाने में मदद मिलेगी। अन्य फोरेंसिक विवरणों की जांच करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। मनचंदा की कथित हत्या कैसे की गई, इसका विवरण आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है।
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