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खुलासा : पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह भी फर्जी कंपनियों में करोड़ों रुपये लगाकर बनाता था व्हाइट मनी

Mon, 03 Apr 2017 04:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 03 Apr 2017 04:13 PM IST
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Yadav Singh also made white money by putting crores of rupees in fake companies
yadav singh - फोटो : अमर उजाला

नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने करोड़ों रुपये के कालेधन को सफेद करने के लिए फर्जी कंपनियों का सहारा लिया था। जांच के दौरान एजेंसियों को यादव सिंह की 12 से ज्यादा फर्जी कंपनियों की जानकारी मिली, जो वास्तव में चल ही नहीं रही थीं।

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इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन फर्जी पतों पर कराया गया था। शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय ने 500 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के खिलाफ 16 राज्यों में 100 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की है।
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सूत्रों के अनुसार यादव सिंह ने अपने रुतबे का इस्तेमाल करते हुए इन फर्जी कंपनियों के नाम पहले प्लॉट अलॉट कराया और बाद में उन प्लॉट को ऊंची कीमत पर बेच दिया गया। 

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एजेंसियों को उसके पास से लगभग 2000 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति का पता चला था

Yadav Singh also made white money by putting crores of rupees in fake companies
file photo - फोटो : अमर उजाला

इसका खुलासा नवंबर-2014 में यादव सिंह के घर व अन्य ठिकानों पर पड़े आयकर विभाग के छापों से हुआ था। यादव सिंह मामले में जांच कर रही एजेंसियों को उसके पास से लगभग 2000 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति का पता चला था, जिसे भ्रष्टाचार के जरिये कमाया गया था।

यादव सिंह का भ्रष्टाचार सामने आने के बाद फरवरी 2015 में तत्कालीन यूपी सरकार ने उसे निलंबित कर दिया था। साथ ही जांच करने के लिए राज्य सरकार ने एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था।

जुलाई 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट के इस आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद तीन फरवरी 2016 को सीबीआई ने यादव सिंह को गिरफ्तार कर         लिया था।

2012 में भी भ्रष्टाचार के आरोप में हुआ था निलंबन

Yadav Singh also made white money by putting crores of rupees in fake companies
file photo
वर्ष 2012 में भी यादव सिंह पर प्राधिकरण के ठेकों में मनमानी कर 954 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा था। इस संबंध में थाना सेक्टर-39 में एक एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

बाद में जांच सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दी गई थी। 2013 में सीबीसीआईडी ने यादव सिंह को क्लीन चिट दे दी थी। इसके बाद सपा सरकार ने यादव सिंह का निलंबन निरस्त कर उन्हें प्राधिकरण में फिर से तैनात कर दिया था।

हर सरकार में रहा दबदबा
सूत्रों के मुताबिक यादव सिंह को बसपा सरकार में काफी प्रभावशाली माना जाता था। यादव पर लगे भ्रष्टाचार के ज्यादातर आरोप बसपा शासन के ही हैं। यादव सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके भाई का बहुत करीबी माना जाता था।

इसके बाद किसी को उम्मीद नहीं थी कि सपा सरकार में उनका निलंबन वापस होगा। इसके विपरीत सपा सरकार में न केवल उनका निलंबन वापस हुआ, बल्कि उन्हें तीनों प्राधिकरण का चीफ इंजीनियर बना दिया गया।

इससे पहले तीनों प्राधिकरणों में ऐसा कोई पद नहीं था। यह पद यादव सिंह के लिए ही बनाया गया था। यादव सिंह के बाद भी इस पद पर वर्तमान में किसी की भी नियुक्ति नहीं हुई है।
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