World Stroke Day: बी-फास्ट का मंत्र कम करेगा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, अस्पतालों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
यह ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर बी-फास्ट का पालन करते हुए मरीज को तुरंत अस्पताल लाना चाहिए।
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बात करते समय अचानक मुंह डेढ़ा हो जाए, बोलने में कठिनाई हो, हाथ न उठे, संतुलन बिगड़ जाए तो सावधान हो जाना चाहिए। यह ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर बी-फास्ट का पालन करते हुए मरीज को तुरंत अस्पताल लाना चाहिए।
यदि चार घंटे के अंदर मरीज को उपचार मिल जाता है तो लकवा होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती है। कोरोना महामारी के बाद से लोगों में बढ़े तनाव के कारण रक्तचाप प्रभावित हुआ है, जिसने ब्रेन स्ट्रोक की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। यही नहीं ब्रेन स्ट्रोक आने की कम से कम आयु में लगातार गिरावट होती जा रही है। इसे लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता बढ़ाने से ऐसे मरीजों को बचाना आसान हो जाएगा। इसके बचाव के लिए सभी को बी-फास्ट की जानकारी होनी चाहिए। ब्रेन स्ट्रोक की प्रकृति में आ रहे बदलाव और इसके उपचार में सुधार के लिए कई स्तर पर अध्ययन चल रहा है।
तैयार हो रहा ब्रेन स्ट्रोक का डाटा बैंक
ब्रेन स्ट्रोक के इलाज को बेहतर बनाने के लिए देशभर में डाटा बैंक तैयार किया जा रहा है। इसके लिए एम्स, जीबी पंत सहित देशभर के बड़े अस्पताल अपने यहां आने वाले मरीजों की जानकारी जुटा कर सेंट्रलाइज्ड प्लेटफार्म पर अपलोड कर रहे हैं। कुछ सालों का डाटा एकत्रित होने के बाद इनपर अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा समय को लेकर भी अध्ययन चल रहा है, ताकि उपचार नीति में सुधार किया जा सके।
इन्हें है ज्यादा खतरा
- मोटापा
- अनियंत्रित मधुमेह
- अनियंत्रित रक्तचाप
- खर्राटा लेना
- अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल व लिपिड
- खराब लाइफ स्टाइल
- धूम्रपान व शराब का सेवन
एम्स में हर दिन आ रहे 500 मरीज
एम्स के न्यूरोलाजी विभाग की प्रोफेसर डा. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि एम्स में हर दिन करीब पांच ऐसे मरीज आते हैं। हर तीन से चार मिनट में एक को ब्रेन स्ट्रोक आता है। यहां कुछ जांच के बाद उपचार शुरू कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में मरीज जितनी देरी से आएगा, उसको लकवा होने की संभावना बढ़ जाएगी।
बदल रहा ट्रेंड
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति गर्ग ने बताया कि पहले ब्रेन स्ट्रोक 60 की उम्र के बाद देखने को मिलता था, लेकिन अब 20 से 30 की उम्र के नौजवान भी इसका शिकार हो रहे हैं। हालांकि इसका कारण क्या है, यह अध्ययन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के केस ज्यादा आते हैं। आरएमएल के औसत आंकड़े 4-5 मामले प्रतिदिन हैं। साढ़े चार घंटे के अंदर अस्पताल में सीटी स्कैन के बाद उपचार देने से लकवे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।