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विश्व गठिया दिवस: मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल दे सकता है गंभीर बीमारी, जा सकती है जान

Fri, 12 Oct 2018 06:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 12 Oct 2018 06:38 AM IST
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World Arthritis Day: more Use of Mobile Phone happening Arthritis Disease
प्रतीकात्मक तस्वीर

विश्व गठिया दिवस की पूर्व संध्या पर राजधानी के डॉक्टरों ने जोड़ों की इस बीमारी को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की। डॉक्टरों ने बताया कि मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल भी लोगों को आर्थराइटिस दे सकता है। इसके पीछे मुख्य वजह है तनाव। जिसके चलते आर्थराइटिस की आशंका कई गुना ज्यादा होती है। युवाओं को कमर से लेकर गर्दन और कंधों में तेज दर्द को नजरंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

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गुरुवार को कनॉट प्लेस स्थित एम्ब्रोसिया ब्लिस में आयोजित प्रेस वार्ता में मेट्रो अस्पताल की डॉ. किरन सेठ ने बताया कि ये बीमारी आम तौर पर घुटनों, हाथों, पैरों और रीढ़ के जोड़ों को प्रभावित करता है। वर्ष 2017 में हुए एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि देश में आर्थराइटिस से जुड़े मरीजों की संख्या कई गुना बढ़ रही है। पिछले वर्ष 180 मिलियन की पहचान भारत में हुई है जबकि अनुमान है कि साल 2025 तक देश में करीब 300 मिलियन तक मरीजों की संख्या पहुंच सकती है।
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हाथों की आर्थराइटिस के आम लक्षण हैं उंगलियों का सख्त होना और उनमें खुजलाहट महसूस होना। कीबोर्ड अथवा फोन पर अधिक देर तक टाइपिंग करने से हाथों में आर्थराइटिस की शिकायत हो सकती है।
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सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के डॉ. हिमांशु कटारिया का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक गतिविधियों में पैदल टहलने के लिए बाहर जाना, योग के लिए पार्क और क्लब में दोस्तों से मिलना शामिल है। लेकिन घुटने का स्थायी दर्द इसमें बाधा बन जाता है और वह घर में बंद हो जाते हैं। लंबी अवधि में इससे उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति प्रभावित होती है। 


वहीं इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर के डॉ. मनिंदर शाह के मुताबिक अगर आर्थराइटिस का मौजूदा ट्रेंड आगे भी जारी रहा, तो अगले 10 साल में ही भारत आर्थराइटिस कैपिटल भी बन सकता है। हाथों में इसकी वजह उम्र से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं अथवा स्थायी संक्रमण हो सकता है, या फिर गंभीर चोट या खान-पान में पोषण की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है।

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