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रेड मीट कमजोर कर सकता है आपकी याददाश्त, बुजुर्गों का भ्रम तोड़ने से दूर हो सकती है ये बीमारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:07 AM IST
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विश्व अल्जाइमर्स दिवस आज है। यानी भूलने की बीमारी का दिन। सतर्क हो जाएं, रेड मीट के सेवन से आपकी यादाश्त कमजोर हो सकती है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि बीफ और मटन जैसे रेड मीट के सेवन से याददाश्त कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है।
जबकि चिकन और मछली जैसे सफेद मीट के सेवन से हानि नहीं होगी। एम्स की डॉ. मंजरी का कहना है कि डिमेंशिया को रोका जा सकता है खत्म नहीं किया जा सकता। जो मरीज इसकी चपेट में होते हैं, वह कभी लक्षणों को नहीं समझ सकते।
वहीं, वेंकटेश्वर हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ दिनेश सरीन बताते हैं कि अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। यह रोग आम तौर पर 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में होता है, लेकिन यह 40 और 50 की उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अतीत की घटनाएं याद नहीं रहती हैं।
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जबकि चिकन और मछली जैसे सफेद मीट के सेवन से हानि नहीं होगी। एम्स की डॉ. मंजरी का कहना है कि डिमेंशिया को रोका जा सकता है खत्म नहीं किया जा सकता। जो मरीज इसकी चपेट में होते हैं, वह कभी लक्षणों को नहीं समझ सकते।
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वहीं, वेंकटेश्वर हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ दिनेश सरीन बताते हैं कि अल्जाइमर भूलने की बीमारी है। यह रोग आम तौर पर 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में होता है, लेकिन यह 40 और 50 की उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अतीत की घटनाएं याद नहीं रहती हैं।
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बालाजी एक्शन अस्पताल के डॉ. राजुल अग्रवाल का कहना है कि पीड़ित व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है। उन्हें फोन मिलाने और किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत आने लगती है। फैसले लेने की क्षमता में कमी आने लगी है। बीमारी बढ़ने पर मरीज अपने घर तक का रास्ता भूल जाता है।
दरअसल, देश में डिमेंशिया जैसी मानसिक बीमारी से परेशान मरीजों की संख्या करीब 40 लाख से ऊपर है। आमतौर पर इस बीमारी की उम्र 60 वर्ष से ऊपर बताई जाती है।
लेकिन बिगड़ती जीवनशैली युवाओं को भी इसकी जद में ला रही है। दिल्ली की बात करें तो यहां डिमेंशिया को लेकर गोविंदपुरी में संचालित एकमात्र डे केयर सेंटर इसी सोसायटी का है।
दरअसल, देश में डिमेंशिया जैसी मानसिक बीमारी से परेशान मरीजों की संख्या करीब 40 लाख से ऊपर है। आमतौर पर इस बीमारी की उम्र 60 वर्ष से ऊपर बताई जाती है।
लेकिन बिगड़ती जीवनशैली युवाओं को भी इसकी जद में ला रही है। दिल्ली की बात करें तो यहां डिमेंशिया को लेकर गोविंदपुरी में संचालित एकमात्र डे केयर सेंटर इसी सोसायटी का है।