एक क्लिक पर मिलेंगी दुनियाभर की शोध की किताबें
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देश में पहली बार दुनियाभर के विभिन्न विषयों पर किए गए शोध समेत विषय से संबंधित किताबों की जानकारी अब एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जुलाई सत्र से एमफिल और पीएचडी छात्रों को डिजिटल रीडिंग लिस्ट का तोहफा देने जा रहा है।
विवि की वेबसाइट में डिजिटल रीडिंग लिस्ट का लिंक दिया होगा। इस लिंक में किताबों का प्रिंट, ई बुक्स समेत जर्नल में प्रकाशित किताबें भी शामिल होंगी।
खास बात यह है कि यदि छात्र चाहेगा तो वर्चुअल बुक्स डिस्कशन के माध्यम से देसी-विदेशी लेखकों से स्काइप (लाइव इंटरनेट) के माध्यम से सीधे छात्रों से बात करवाई जाएगी।
डिजिटल रीडिंग लिस्ट का खाका तैयार हो रहा है
जेएनयू कैंपस स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी छात्रों को अनोखी सुविधा उपलब्ध करवाने जा रही है, जिसमें साइंस, कला व वाणिज्य समेत भाषाओं से संबंधित सभी प्रकार की किताबें डिजिटल लाइब्रेरी में आ जाएंगी।
विश्वविद्यालय डिजिटल रीडिंग लिस्ट का खाका तैयार कर रहा है। अभी तक फैकल्टी, रिसर्च स्कॉलर्स को विषय से संबंधित किताबों की लिस्ट देती है।
लेकिन उसमें से अधिकतर किताब नहीं मिल पाती हैं, जिसके चलते छात्रों को परेशानी होती थी। नई व्यवस्था से कोर्स में बुक चैप्टर, आर्टिकल का वेबसाइट पर हाइपर लिंक होगा।
सीधा लिंक ओपन करने से किताब समेत चैप्टर खुलेगा
डिजिटल रीडिंग लिस्ट में डिजिटल रीपोसेटरी लिंक होगा, इसके माध्यम से किताब व आर्टिकल तलाशना आसान होगा। यदि कोई किताब सिर्फ प्रिंट में उपलब्ध होगी तो उसका कैटलॉग तैयार करके लाइब्रेरी में रखा जाएगा, ताकि छात्र सीधे किताब तक पहुंच सकें।
ई-बुक्स का सीधा लिंक ओपन करने से किताब समेत चैप्टर खुलेगा। इसके अलावा स्कैन करके भी अपलोड किया जाएगा। विभिन्न विषयों में किए गए शोध ई जर्नल से आर्टिकल के लिंक जोड़े जाएंगे।
जेएनयू यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन के मुताबिक एमफिल और पीएचडी छात्रों को शोध व पढ़ाई के दौरान पाठ्यक्रम के तहत विभिन्न विषयों की किताबों की लिस्ट थमा दी जाती थी। कई बार किताब मार्केट समेत लाइब्रेरी में भी उपलब्ध नहीं होती थी। ऐसे में रिसर्च स्कॉलर्स के पाठ्यक्रम से कई आर्टिकल छूट जाते थे। इसके अलावा कॉपी राइट के कारण फोटोकॉपी नहीं कर पाते थे। छात्रों का किताबों पर खर्च होने वाले लाखों रुपये की बचत होगी।