'टीवी में काम करने वाले बच्चों को क्यों नहीं पकड़ते?'
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सड़कों पर नट समुदाय के बच्चे अपने परंपरागत कौशल को दिखा कर पैसा कमा रहे हैं। उन्हें बाल श्रम व अन्य आरोपों में उनको पकड़ा जाता है।
क्या टीवी सीरियल में काम करने वाले बच्चों के मामले में भी पुलिस या एनजीओ ऐसा ही रवैया अपनाती है। हाईकोर्ट ने एक मामले में यह सवाल पुलिस के समक्ष उठाया।
साथ ही इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए दिशा-निर्देश तय करने का निर्णय किया है। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति पीएस तेजी की खंडपीठ ने नट के दो बच्चों को पुलिस की सहायता से एक एनजीओ को सौंपने के खिलाफ उनके पिता की याचिका पर सवाल उठाया।
'क्या उनकी शिक्षा प्रभावित नहीं होती'
अदालत ने माना कि बच्चों से इस प्रकार सड़कों पर कौशल के नाम पर भीख मंगवाना गलत है। वहीं वे देखते हैं कि टीवी सीरियल में छोटे-छोटे बच्चे काम करते हैं। क्या उससे उनकी शिक्षा प्रभावित नहीं होती।
अदालत ने कहा के सीरियल में काम करने वाले बच्चों को क्या पैसा नहीं मिलता और क्या यह बाल श्रम नहीं है। अदालत के पूछने पर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि यह भी ठीक नहीं है।
लेकिन जब भी कोई शिकायत आती है तो पुलिस कानूनी कार्रवाई करती है। अदालत ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है, अत: वे मामले में दिशा निर्र्देश जारी करेंगे।
खंडपीठ ने फिलहाल दो बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंपने का निर्देश देते हुए उनको बच्चों से भविष्य में ऐसा काम न करवाने व उनको स्कूल में पढ़ाने का निर्देश दिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
13 अगस्त को नट समुदाय के कुछ लोग सफदरजंग एंकलेव में परंपरागत एरोबिक कौशल दिखा रहे थे। एक महिला ने पुलिस को फोन कर शिकायत कर दी कि छोटे बच्चों से काम करवाया जा रहा है।
पुलिस आई व सभी को पकड़कर थाने ले गई। अगले दिन चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश पर पकड़े गए दो बच्चों को एक एनजीओ के सुपुर्द कर दिया गया।
बच्चों के अभिभावकों ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनको बच्चों से मिलने भी नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि वे भूमिहीन है और नट समुदाय से होने के कारण परंपरागत कौशल दिखाकर रोजीरोटी कमाते हैं।
उनके बच्चे भी यहीं काम करते है। ऐसे में उनके बच्चे उनके सुपुर्द किए जाएं।