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बस यात्रा: दिल्ली सरकार ने किया साफ- महिलाओं के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड अनिवार्य, वर्ना लेना होगा टिकट
Mon, 05 Oct 2026 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 05 Oct 2026 03:00 AM IST
सार
अब दिल्ली की रहने वाली महिलाओं को मुफ्त सफर के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड (एनसीएमसी) का इस्तेमाल करना होगा। जिन महिलाओं के पास पिंक सहेली कार्ड नहीं होगा, उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह किराया देकर टिकट लेना पड़ेगा।
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सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड
- फोटो : pinksahelicard.in
विस्तार
दिल्ली सरकार ने महिलाओं के लिए डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा को लेकर नियम स्पष्ट कर दिए हैं। अब दिल्ली की रहने वाली महिलाओं को मुफ्त सफर के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड (एनसीएमसी) का इस्तेमाल करना होगा। यह व्यवस्था एसी और नॉन-एसी दोनों तरह की बसों पर लागू होगी। जिन महिलाओं के पास पिंक सहेली कार्ड नहीं होगा, उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह किराया देकर टिकट लेना पड़ेगा। यह सुविधा ट्रांसजेंडर यात्रियों पर भी लागू होगी।
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पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड इसी साल मार्च में शुरू किया गया था। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) पर आधारित इस कार्ड ने मुफ्त यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले कागजी पिंक टिकटों की जगह ली है। परिवहन विभाग के अनुसार, महिलाओं को पहले ही सूचित किया गया था कि 30 सितंबर के बाद मुफ्त यात्रा के लिए स्मार्ट कार्ड अनिवार्य होगा।
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सरकार अब भी महिलाओं को कार्ड की अनिवार्यता के बारे में जागरूक करने के लिए बसों और डिपो में घोषणाएं कराएगी। इसके अलावा सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से भी जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक करीब 19 लाख महिलाएं पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनवा चुकी हैं। जिन महिलाओं ने अभी तक कार्ड नहीं बनवाया है, वे इसे बनवा सकती हैं।
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आसान और पारदर्शी व्यवस्था का दावा
अधिकारियों का कहना है कि पिंक सहेली कार्ड को अनिवार्य करना बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था को अधिक आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे यात्रा की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के साथ सुविधा और सुरक्षा भी बढ़ेगी। 30 सितंबर की समयसीमा बीतने के बावजूद महिलाओं में पिंक सहेली कार्ड को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं है। कई बसों में बिना कार्ड यात्रा करने वाली महिलाएं टिकट को लेकर परिचालकों से जानकारी लेती नजर आ रही हैं।
पिंक कार्ड के लिए लंबी कतार, घंटों बेकार
दिल्ली की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ लेने के लिए जरूरी पिंक कार्ड अब महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बनता दिख रहा है। कार्ड बनवाने के लिए शाहदरा और हसनपुर बस डिपो में रविवार को महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। कई महिलाएं सुबह छह बजे ही लाइन में लग गईं, लेकिन दोपहर तक उनकी बारी नहीं आई।
चार से पांच घंटे तक इंतजार के बावजूद कार्ड नहीं बन पाने से महिलाओं में नाराजगी दिखाई दी। कतार में छोटी बच्चियों के साथ आई महिलाएं और बुजुर्ग भी परेशान होते रहे। हसनपुर डिपो में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। यहां महिलाओं की कतार सैकड़ों मीटर तक पहुंच गई। पहले महिलाओं को कागज की पर्ची पर टोकन और नंबर दिया जा रहा था। इसके बाद नंबर आने पर उन्हें कार्ड बनवाने के लिए अंदर भेजा जा रहा था। दोपहर करीब दो बजे तक लगभग 250 महिलाओं को टोकन दिए जा चुके थे, जबकि कार्ड महज करीब 100 महिलाओं के ही बन पाए। ऐसे में बाकी महिलाएं अपनी बारी के इंतजार में लाइन में खड़ी रहीं।
कतार में लगीं गीतांजलि ने बताया कि वह एक दिन पहले भी पिंक कार्ड बनवाने आई थीं। कई घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी उनका कार्ड नहीं बन सका। रविवार को वह फिर करीब तीन घंटे से कतार में खड़ी थीं। उन्होंने कहा, सुबह से खड़े हैं, पता नहीं नंबर कब आएगा। बुजुर्ग राजकुमारी सुबह आठ बजे बहू के साथ पहुंची थीं। उम्र अधिक होने के कारण उन्हें लाइन में आगे कर दिया गया और उनका कार्ड बन गया, लेकिन बहू को अभी भी इंतजार करना पड़ा।
शाहीन ने बताया कि बस में सफर के दौरान उनसे पिंक कार्ड मांगा गया और जल्द बनवाने के लिए कहा गया। डिपो पहुंचने पर लंबी कतार देखकर उन्हें कई घंटे इंतजार करना पड़ा। महिलाओं की बढ़ती संख्या और सीमित कार्ड बनाने की क्षमता ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि रोजाना कितने कार्ड बनाए जा रहे हैं और महिलाओं को कार्ड के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।