इंदिरा की मृत देह पर क्यों फूट-फूट कर रो पड़े थे अमिताभ?
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आपने यूं तो कई ऐसी कहानियां पढ़ी और सुनी होंगी जिनपर यकीन करना बेहद मुश्किल है। आज भी हम आपको एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसपर शायद आप यकीन नहीं करेंगे।
ये कहानी जुड़ी है देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बॉलीवुड के महानायक अमिताभ की निजी जिंदगी से। इन दोनों परिवारों की नजदीकियों ने एक ऐसी कहानी को जन्म दे दिया जिसका बेतहराशा जिक्र किया गया।
कुछ लोगों के बीच एक धारणा ये बनी कि अमिताभ बच्चन इंदिरा गांधी के बेटे हैं, लेकिन इन दोनों के बीच के रिश्ते का असल सच क्या है ये कम ही लोग जानते हैं। आज हम इस कहानी में उसी सच से परदा उठा रहे हैं।
इंदिरा के पुत्र हैं अमिताभ!
नेहरू-गांधी परिवार के साथ जुड़ी अनगिनत गल्प कथाओं में एक किस्सा ये है कि अमिताभ बच्चन इंदिरा गांधी के पुत्र थे। अब जबकि इंदिरा गांधी की मौत के तीन दशक बीत चुके हैं और खुद महानायक अमिताभ बच्चन भी उम्र के सातवें दशक में हैं।
आज भी लोग चटखारे लेकर इस किस्से को बयां कर रहे हैं। अमिताभ को इंदिरा का पुत्र बताने के पीछे कई तर्क दिए जाते हैं। अक्सर सुनाई जाने वाली तो एक कहानी ये भी है कि अमिताभ को फिल्मों में काम देने के लिए इंदिरा ने सिफारिशी चिट्ठी लिखी थी।
हालांकि कुछ लोग इस किस्से पर यकीन नहीं करते हैं।
जब इंदिरा के शव के पास फूट-फूटकर रो पड़े थे अमिताभ
दूसरा किस्सा भी बेहद ही दिलचस्प है। इस किस्से में कहा गया है कि कुली के सेट पर घायल होने के बाद इंदिरा ने ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन को खास हिदायत दी थी।
साथ ही अगले दिन विदेश से आए कुछ डॉक्टरों की टीम ने अमिताभ का इलाज भी किया था। इतना ही नहीं इंदिरा की आखिरी यात्रा के दौरान अमिताभ फूट-फूट कर रो रहे थे।
अमिताभ उनके शव के पास ऐसे खड़े रहे जैसे एक पुत्र अपनी मां को आखिरी विदाई दे रहा हो।
ये है इस कहानी का असल सच
इन सभी बातों में सच्चाई है, लेकिन ये बातें कहीं से अमिताभ को इंदिरा का पुत्र साबित नहीं कर सकती हैं। वहीं हकीकत ये है कि अमिताभ के पिता हरिवंशराय बच्चन के अच्छे संबंध जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी से थे।
इंदिरा की दोस्ती अमिताभ की मां तेजी बच्चन से भी थी। इन दोनों परिवारों का संबंध इलाहाबाद से जुड़ा हुआ था। परिवारों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था।
इस पारिवारिक दोस्ती के नाते इंदिरा अमिताभ को अपने बेटे की तरह स्नेह करती थीं।
राजीव और अमिताभ में थी गहरी दोस्ती
खुद राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन के बीच भी गहरी दोस्ती थी। दोनों की पढ़ाई एक ही स्कूल में हुई थी। प्रियंका गांधी की शादी में अमिताभ बच्चन मेहमानों का स्वागत करने के लिए खड़े थे।
लंबे समय की इस पारिवारिक दोस्ती को ध्यान में रखकर इंदिरा ने सुनील दत्तो को अमिताभ के लिए सिफारिशी चिट्ठी लिखी थी और उन्होंने शेरा और रेशमा में अमिताभ के लिए रोल दे दिया था।
पारिवारिक दोस्त के बेटे के लिए सिफारिसी चिट्ठी लिखना या बीमार होने पर ध्यान रखने की ताकीद करना एक सामान्य बात है।
अब खत्म हो गई है इस रिश्ते की गहराई
यह लंबे समय की दोस्ती से उपजे स्नेह और सामान्य शिष्टाचार का सबब है कि मुश्किल वक्त में एक-दूसरे के साथ खड़े हों। फिलहाल गांधी-बच्चन परिवार के बीच रिश्तों की वह गहराई खत्म हो चुकी है।
फिर भी संबंधों की इस सच्चाई को दरकिनार कर लोग आज भी इंदिरा के जमाने के इस किस्से को याद ही नहीं करते बल्कि इसे बेहद दिलचस्पी के साथ लोगों की भीड़ में बयां करते हैं।
खैर फिल्मों में अभिनय का चमत्कार दिखाने वाले अमिताभ और राजनीति की कद्दावर शख्सियत के मां-बेटे की कहानी का सच यही है।
साभार: तहलका