फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Who is behind the protection of the animalism plot in case of Nepali women.

नेपाली युवतियों से हैवानियत करने वालों को बचाने की हो रही साजिश

Sun, 13 Sep 2015 12:09 PM IST
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव
यशलोक सिंह/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 13 Sep 2015 12:09 PM IST
विज्ञापन
Who is behind the protection of the animalism plot in case of Nepali women.

सऊदी अरब के राजनयिक पर नेपाली महिलाओं से दुष्कर्म के आरोप का मामला दिनों दिन उलझता जा रहा है। केस की तह तक जाने में राजनयिक के निवास स्थान की सीसीटीवी फुटेज काफी मददगार साबित हो सकती है।

विज्ञापन


लेकिन उसका डाटा करप्ट हो जाने से गुड़गांव पुलिस को करारा झटका लगा है। साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि कहीं सीसीटीवी डाटा का करप्ट होना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं।
विज्ञापन


आरोपी राजनयिक दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे स्थित हाई प्रोफाइल कैटरोइना सोसायटी में रहता है। पुलिस को उन लोगों की तलाश है, जिनका राजनयिक के यहां लगातार आना-जाना रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

महिलाओं के साथ दोस्त भी करते थे हैवानियत

Who is behind the protection of the animalism plot in case of Nepali women.

पीड़ित नेपाली महिलाओं का आरोप है कि राजनयिक के अलावा उसके साथी भी उनके साथ हैवानियत करते थे। राजनयिक के साथियों के बारे में तभी पता लग सकता है, जब पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिल जाए।

मगर इसके करप्ट होने के बाद पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ाने में परेशानी महसूस कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी कैमरे का डाटा करप्ट होने के बाद भी जांच को दिशा देने में मदद मिल सकती है।

पुलिस को कैटरोइना सोसायटी में राजनयिक के यहां आने-जाने वालों का पूरा ब्यौरा वहां के विजिटर रजिस्टर से मिल सकता है। अगर पुलिस इसे कब्जे में लेकर छानबीन करे तो भी तस्वीर साफ हो सकती है।

सोसायटी में आसान नहीं है एंट्री

Who is behind the protection of the animalism plot in case of Nepali women.

क्योंकि हाई प्रोफाइल सोसायटी में कोई ऐसे ही प्रवेश नहीं कर सकता। रजिस्टर में उनकी बाकायदा एंट्री होती है। आगंतुक को जिसके यहां जाना होता है, उसे वहां भेजने की अनुमति गार्ड फोन के माध्यम से लेता है। इसके बाद ही वह सोसायटी में प्रवेश कर पाता है।

रिकवर हो सकता है डाटा-

डाटा एक्सपर्ट सचिन गुुप्ता का कहना है सीसीटीवी का डाटा करप्ट होने के बाद भी उसे रिकवर किया जा सकता है। यह कोई  बड़ी बात नहीं है। उन्होंने बताया कि डाटा के तौर पर फुटेज रेड-1 से 5 तक की कॉन्फिगरेशन में सेव होती है।

अगर हार्ड ड्राइव को विशेषज्ञ तक ले जाया जाए तो वह डाटा निकाल सकता है। उन्होंने कहा कि मुंबई में आतंकी हमले के दौरान आतंकियों की पहचान के लिए मुंबई पुलिस ने बुरी तरह से टूटी हार्ड डिस्क  अमेरिका भेज फुटेज रिकवर कराई थी।

डाटा सिर्फ मल्टीपल ओवरराइट (करीब 50 बार) होने पर ही खत्म हो सकता है, अन्यथा नहीं। इस प्रकार ओवरराइट सिर्फ हाई लेवल का एक्सपर्ट ही कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed