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Delhi : वीजा पाने में शिक्षा बनी बाधा तो महिला ने लिया स्कूल में दाखिला, कुछ अलग है NDMC का यह स्कूल
Mon, 29 Jan 2024 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 29 Jan 2024 05:37 AM IST
सार
उन्होंने अपने लक्ष्य व उद्देश्य को पूरा करने में आड़े आई शिक्षा की बाधा को पार करने के लिए अपनी पोती व बेटी की उम्र की लड़कियों के साथ बैठकर पढ़ाई की।
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किदवई नगर ईस्ट में डे टाइम सेकेंडरी स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जब कुछ करने की ख्वाहिश हो तो कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। ऐसा ही कर दिखाया है दिल्ली की कई महिलाओं ने। उन्होंने अपने लक्ष्य व उद्देश्य को पूरा करने में आड़े आई शिक्षा की बाधा को पार करने के लिए अपनी पोती व बेटी की उम्र की लड़कियों के साथ बैठकर पढ़ाई की।
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एक महिला ने विदेश जाने के लिए वीजा प्राप्त करने के लिए 10वीं पास की, जबकि दूसरी महिला ने धार्मिक पुस्तक पढ़ने के लायक बनने के लिए स्कूल में प्रवेश लिया। जबकि एक महिला अपने परिजनों को 10वीं पास करने का सरप्राइज देेने के लिए पढ़ाई कर रही हैं।
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एनडीएमसी ने लड़कियों व महिलाओं को शिक्षित करने के लिए किदवई नगर ईस्ट में डे टाइम सेकेंडरी स्कूल खोल रखा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई वर्ष पहले इस स्कूल में छोटो देवी 55 वर्ष की आयु में पहली कक्षा में पढ़ने आईं और उन्होंने 60 साल की उम्र में पांचवीं कक्षा पास की। दरअसल उन्हें धार्मिक पुस्तकें पढ़ने का शौक था, लेकिन शिक्षित न होने से वह ऐसा नहीं कर पा रहीं थीं। समस्या से निपटने के लिए उन्होंने स्कूल में प्रवेश लिया।
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रेखा नामक महिला ने कम पढ़ी होने के कारण अपने पति के साथ विदेश नहीं जा पाने के कारण इस स्कूल में प्रवेश लिया। वह आठवीं पास थीं और उन्होंने वीजा प्राप्त करने के लिए इस स्कूल से 10वीं पास की। वर्ष 2018 में 10वीं पास करने के बाद उनकी विदेश जाने की इच्छा पूरी हो सकी। इस दौरान उसकी उम्र करीब 40 साल हो गई थी। वहीं, गीता नामक एक महिला ने नौकरी करने के उद्देश्य से शादी के बाद आठवीं कक्षा में प्रवेश लिया और वह बेटे को गोद में लेकर पढ़ने आतीं थीं। उन्होंने इस स्कूल से 10वीं पास की। इसके बाद उन्होंने एक निजी कंपनी में नौकरी की।
1991 में खोला गया था स्कूल
एनडीएमसी ने यह स्कूल वर्ष 1991 में शुरू किया था। उस दौरान इस स्कूल में आठवीं तक शिक्षा देने की व्यवस्था की गई, लेकिन दो साल बाद इस स्कूल में 10वीं तक शिक्षा देेने की शुरुआत कर दी गई। यह स्कूल उसके सभी स्कूलों की तरह सीबीएसई से संबंद्ध है। इस स्कूल में लड़कियों व महिलाओं को मुफ्त में शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा उनको मिड डे मील, किताबें, वर्दी भी दी जाती है। इतना ही नहीं, लड़कियों को शिक्षित करने के साथ-साथ उन्हें सिलाई भी सिखाई जाती है।
घरवालों से छिपकर भी महिलाएं कर रहीं पढ़ाई
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ रही एक महिला अपने परिजनों से छुपकर शिक्षा ग्रहण करने आती है। वह सुबह घरों में कार्य करती है और उसके बाद वह स्कूल आती है। वह अपने परिजनों को 10वीं पास कर सरप्राइज देना चाहती हैं। वहीं, चार साल पहले दादी व पोती एक साथ पढ़ने आती थी। दादी तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। जबकि पोती आठवीं में पढ़ती थी।
उम्र की बंदिश तोड़ने के लिए खुला स्कूल
एनडीएमसी के इस स्कूल में वह लड़कियां पढ़ सकती है, जिनको उनके परिजन किसी कारणवश समय रहते स्कूल में प्रवेश नहीं दिला पाते है। उम्र अधिक होने के बाद उन्हें सामान्य स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जाता है, लेकिन एनडीएमसी के इस स्कूल में किसी भी आयु में लड़कियां व महिलाएं प्रवेश ले सकती है।