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Delhi NCR News: दिल्ली में स्टार्टअप की नई उड़ान, 407.5 करोड़ का फंड
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-सरकार का बड़ा दांव, 10 हजार स्टार्टअप को बढ़ावा, चार लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य
-उद्योग जगत से उठी आवाज, नियमों का जाल काटो, दिल्ली को बनाओ डीरिग्युलेशन कैपिटल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली को सिर्फ देश की राजधानी नहीं, बल्कि स्टार्टअप और इनोवेशन की राजधानी बनाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार की प्रस्तावित स्टार्टअप एवं इनक्यूबेशन नीति-2026 में 407.5 करोड़ रुपये के फंड के साथ स्टार्टअप्स को जमीन, निवेश, सरकारी खरीद, मेंटरशिप और नियामकीय सहायता देने का खाका तैयार किया गया है। रविवार दिल्ली के एक होटल में विशेष गोलमेज बैठक में सरकार ने नीति को अंतिम रूप देने से पहले देश के प्रमुख स्टार्टअप संस्थापकों, निवेशकों और उद्योगपतियों से सीधे सुझाव लिए।
इसमें उद्योग जगत ने सरकार के सामने साफ एजेंडा रखा-स्टार्टअप को सब्सिडी से ज्यादा आसान नियम और बाजार चाहिए। प्रतिभागियों ने दिल्ली को देश की ‘डीरिग्युलेशन कैपिटल’ बनाने, कारोबार शुरू करने और विस्तार करने में आने वाली नियामकीय अड़चनें कम करने तथा स्टार्टअप्स के लिए जमीन और कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर जोर दिया। एफएआर और सर्किल रेट को तर्कसंगत बनाने का सुझाव भी दिया गया।
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सरकार बनेगी स्टार्टअप की पहली ग्राहक
नीति में स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार खोलने पर खास जोर देने की मांग हुई। उद्योग जगत का सुझाव था कि सरकार खुद स्टार्टअप्स के उत्पाद और तकनीक की शुरुआती बड़ी ग्राहक बने। इससे नए उद्यमों को बाजार भी मिलेगा और सरकारी तंत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा भी मिलेगा। डीप-टेक और गवटेक कंपनियों के लिए पब्लिक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सैंडबॉक्स विकसित करने का सुझाव दिया गया। एआई, फिनटेक, एग्री-टेक, डिफेंस-एयरोस्पेस, डीप-टेक, गवटेक, लीगल-टेक, एड-टेक और मेड-टेक को भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों के तौर पर विकसित करने की पैरवी की गई।
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407.5 करोड़ से निजी निवेश खींचने की रणनीति
सरकार के प्रस्तावित 407.5 करोड़ रुपये के फंड को सीधे खर्च करने के बजाय फंड ऑफ फंड्स के रूप में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया । महिला उद्यमियों के लिए अलग श्रेणी और सुरक्षित फंडिंग की व्यवस्था का सुझाव भी सामने आया। इसके अलावा स्टार्टअप्स की नियामकीय समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए विशेषज्ञों वाली स्थायी हेल्पडेस्क बनाने की मांग की गई।
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कॉलेजों से निकलेगा अगला स्टार्टअप इकोसिस्टम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों और स्कूलों में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बैठक में आईटीआई को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने, स्कूल-कॉलेजों में उद्यमिता सलाहकार प्रकोष्ठ बनाने, पूर्व छात्रों और आईआईटी से जुड़े मेंटरशिप नेटवर्क तैयार करने तथा विद्यार्थियों को उद्यमिता के लिए अकादमिक लचीलापन देने का सुझाव दिया गया।
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10 हजार स्टार्टअप, चार लाख रोजगार
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य अपने कार्यकाल में 10 हजार से अधिक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित और सहयोग देना है। इन स्टार्टअप्स के जरिये चार लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में इंफो एज के संस्थापक संजीव भीचंदानी, स्नैपडील के सह-संस्थापक कुणाल बहल, इनोव8 के संस्थापक रितेश मलिक, सीएआरएस24 के विक्रम चोपड़ा और अर्बन कंपनी के अभिराज सिंह भाल समेत कई प्रमुख स्टार्टअप संस्थापक और निवेशक शामिल हुए।
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-उद्योग जगत से उठी आवाज, नियमों का जाल काटो, दिल्ली को बनाओ डीरिग्युलेशन कैपिटल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली को सिर्फ देश की राजधानी नहीं, बल्कि स्टार्टअप और इनोवेशन की राजधानी बनाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार की प्रस्तावित स्टार्टअप एवं इनक्यूबेशन नीति-2026 में 407.5 करोड़ रुपये के फंड के साथ स्टार्टअप्स को जमीन, निवेश, सरकारी खरीद, मेंटरशिप और नियामकीय सहायता देने का खाका तैयार किया गया है। रविवार दिल्ली के एक होटल में विशेष गोलमेज बैठक में सरकार ने नीति को अंतिम रूप देने से पहले देश के प्रमुख स्टार्टअप संस्थापकों, निवेशकों और उद्योगपतियों से सीधे सुझाव लिए।
इसमें उद्योग जगत ने सरकार के सामने साफ एजेंडा रखा-स्टार्टअप को सब्सिडी से ज्यादा आसान नियम और बाजार चाहिए। प्रतिभागियों ने दिल्ली को देश की ‘डीरिग्युलेशन कैपिटल’ बनाने, कारोबार शुरू करने और विस्तार करने में आने वाली नियामकीय अड़चनें कम करने तथा स्टार्टअप्स के लिए जमीन और कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर जोर दिया। एफएआर और सर्किल रेट को तर्कसंगत बनाने का सुझाव भी दिया गया।
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सरकार बनेगी स्टार्टअप की पहली ग्राहक
नीति में स्टार्टअप्स के लिए सरकारी बाजार खोलने पर खास जोर देने की मांग हुई। उद्योग जगत का सुझाव था कि सरकार खुद स्टार्टअप्स के उत्पाद और तकनीक की शुरुआती बड़ी ग्राहक बने। इससे नए उद्यमों को बाजार भी मिलेगा और सरकारी तंत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा भी मिलेगा। डीप-टेक और गवटेक कंपनियों के लिए पब्लिक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सैंडबॉक्स विकसित करने का सुझाव दिया गया। एआई, फिनटेक, एग्री-टेक, डिफेंस-एयरोस्पेस, डीप-टेक, गवटेक, लीगल-टेक, एड-टेक और मेड-टेक को भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों के तौर पर विकसित करने की पैरवी की गई।
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407.5 करोड़ से निजी निवेश खींचने की रणनीति
सरकार के प्रस्तावित 407.5 करोड़ रुपये के फंड को सीधे खर्च करने के बजाय फंड ऑफ फंड्स के रूप में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया । महिला उद्यमियों के लिए अलग श्रेणी और सुरक्षित फंडिंग की व्यवस्था का सुझाव भी सामने आया। इसके अलावा स्टार्टअप्स की नियामकीय समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए विशेषज्ञों वाली स्थायी हेल्पडेस्क बनाने की मांग की गई।
कॉलेजों से निकलेगा अगला स्टार्टअप इकोसिस्टम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों और स्कूलों में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बैठक में आईटीआई को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने, स्कूल-कॉलेजों में उद्यमिता सलाहकार प्रकोष्ठ बनाने, पूर्व छात्रों और आईआईटी से जुड़े मेंटरशिप नेटवर्क तैयार करने तथा विद्यार्थियों को उद्यमिता के लिए अकादमिक लचीलापन देने का सुझाव दिया गया।
10 हजार स्टार्टअप, चार लाख रोजगार
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य अपने कार्यकाल में 10 हजार से अधिक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित और सहयोग देना है। इन स्टार्टअप्स के जरिये चार लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में इंफो एज के संस्थापक संजीव भीचंदानी, स्नैपडील के सह-संस्थापक कुणाल बहल, इनोव8 के संस्थापक रितेश मलिक, सीएआरएस24 के विक्रम चोपड़ा और अर्बन कंपनी के अभिराज सिंह भाल समेत कई प्रमुख स्टार्टअप संस्थापक और निवेशक शामिल हुए।