दिल्ली में चिट्ठी का त्रिकोणीय युद्ध, केजरीवाल ने एलजी और गृहमंत्री से पूछे सवाल
दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और उपराज्यपाल के बीच चिट्ठी का त्रिकोणीय युद्ध सामने आ गया है। नए मामले में गृह मंत्रालय ने दिल्ली में आईएएस कैडर के पद पर अन्य अधिकारियों की नियुक्ति और सलाहकारों की नियुक्ति पर सूचना मांगी है।
हालांकि, इस मामले में सीधे तौर पर केजरीवाल ने जानकारी नहीं दिया। वहीं गृहमंत्री और उपराज्यपाल को पत्र लिखकर दिल्ली की कानून व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम और प्रधानमंत्री या गृहमंत्री की तरफ से जताई गई चिंता की जानकारी मांगी है। साथ ही दिल्ली की कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल पूछे हैं।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा है कि अधिकारवश आपको यह सूचना मांगने का अधिकार नहीं है। हां, केंद्र सरकार राज्य सरकार से पत्र लिखकर सूचना मांग सकती है।
हालांकि, उन्होंने कहा है कि दिल्ली में आईएएस कैडर के पोस्ट पर दो-चार से ज्यादा दूसरे अधिकारी नहीं होंगे। उन्होंने लिखा है, केन्द्र ने यह जानकारी शिवराज सिंह चौहान, चंद्रबाबू नायडू, वसुंधरा राजे, देवेंद्र फडनवीस से भी मांगी होगी, वहां की क्या स्थिति है? जब आप यूपी के मुख्यमंत्री थे, तब ऐसे कितने अधिकारी होते थे? मुझे बताया गया कि हर राज्य में कई सौ अधिकारी होते हैं, राज्यवार संख्या भेजेंगे तो अति कृपा होगी।
कभी गृहमंत्री या पीएम से कानून व्यवस्था पर मुलाकात हुई?
केजरीवाल ने लिखा है, आपने कंसलटेंट की जानकारी मांगी है, मैं सूची बनवाता हूं। लेकिन, आप बताएं कि दो साल के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने कितने कंसलटेंट नियुक्त किए? दोनो सरकारों के बीच कंसलटेंट की सूची आदान-प्रदान करने से फायदा होगा।
उपराज्यपाल नजीब जंग को लिखे गए पत्र में केजरीवाल ने कहा है कि अधिकारियों व कंसलटेंट की जानकारी आपने गृह मंत्रालय के कहने पर मांगी है, जवाब गृहमंत्री को भेज रहा हूं, आपके स्तर पर कार्यवाही की जरूरत नहीं। इसके अलावा गृहमंत्री से उपराज्यपाल को कानून व्यवस्था की दिक्कत को लेकर जवाब तलब करने और उसके जवाब की जानकारी मांगी है।
कभी गृहमंत्री या पीएम से कानून व्यवस्था पर मुलाकात हुई?
उपराज्यपाल से पूछा है कि क्या कभी गृहमंत्री या प्रधानमंत्री से दिल्ली की कानून व्यवस्था को लेकर मुलाकात हुई है? या उन्होंने कभी चिंता जाहिर की है? कोई कदम उठाए? मुख्यमंत्री ने पूछा है कि केंद्र सरकार और उपराज्यपाल ने अपराध-बलात्कार रोकने के लिए जो कदम उठाए हैं, उसका ब्यौरा दें।
उन्होंने यह भी लिखा है कि जब तक कानून व्यवस्था और दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी सीधे तौर पर चुनी गई सरकार को नहीं देते, एक घंटा दिल्ली की कानून व्यवस्था की समस्याएं सुलझाने के लिए देना शुरू करें। उपराज्यपाल से पूछा है कि आप बताएं-कानून व्यवस्था ठीक करने के लिए क्या कदम उठाएं और आने वाले समय में क्या करने जा रहे हैं?