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Delhi NCR News: दिल्ली में एआई तकनीक से 877 मरीजों में टीबी की पहचान
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1.68 लाख लोगों के एक्स-रे की जांच, एआई से संदिग्ध मिले 18,377 लोग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। टीबी की शुरुआती पहचान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक प्रभावी साबित होती नजर आ रही है। दिल्ली की शहरी झुग्गी बस्तियों में जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच हुए एक अध्ययन में एआई की मदद से 1,68,568 लोगों के छाती के एक्स-रे की जांच की गई। इनमें 18,377 लोगों में टीबी के संभावित संकेत मिले। आगे की जांच में 16,866 लोगों का मॉलिक्यूलर टेस्ट किया गया, जिसमें 877 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई।
अध्ययन के तहत 3,566 स्क्रीनिंग कैंप लगाए गए। इनमें 95,724 महिलाएं, 72,820 पुरुष और 24 ट्रांसजेंडर शामिल रहे। स्क्रीनिंग में 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 36.3 प्रतिशत थी। एआई जांच में 10.9 प्रतिशत लोगों में टीबी के संभावित संकेत मिले, जबकि 91.7 प्रतिशत संदिग्ध लोगों का मॉलिक्यूलर टेस्ट कराया गया।
अध्ययन के अनुसार, हर एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग में 520 टीबी मरीज मिले। एक मरीज की पहचान के लिए औसतन 192 लोगों की स्क्रीनिंग करनी पड़ी।
यह अध्ययन दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन, दिल्ली स्टेट टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम और द यूनियन टीबी विभाग से जुड़े शोधकर्ताओं ने किया है। इसे इंडियन जर्नल ऑफ ट्यूबरकुलोसिस में प्रकाशित किया गया है।
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शोधकर्ताओं के अनुसार, बिना लक्षण वाले लोगों में जांच की जरूरत महसूस न होना और काम की व्यस्तता स्क्रीनिंग में बड़ी बाधा रही। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं की भागीदारी और घर के नजदीक जांच सुविधा से लोगों की भागीदारी बढ़ी। स्क्रीनिंग उपकरण भी निर्धारित संचालन दिनों में केवल 3.5 प्रतिशत दिन बंद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। टीबी की शुरुआती पहचान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक प्रभावी साबित होती नजर आ रही है। दिल्ली की शहरी झुग्गी बस्तियों में जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच हुए एक अध्ययन में एआई की मदद से 1,68,568 लोगों के छाती के एक्स-रे की जांच की गई। इनमें 18,377 लोगों में टीबी के संभावित संकेत मिले। आगे की जांच में 16,866 लोगों का मॉलिक्यूलर टेस्ट किया गया, जिसमें 877 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई।
अध्ययन के तहत 3,566 स्क्रीनिंग कैंप लगाए गए। इनमें 95,724 महिलाएं, 72,820 पुरुष और 24 ट्रांसजेंडर शामिल रहे। स्क्रीनिंग में 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 36.3 प्रतिशत थी। एआई जांच में 10.9 प्रतिशत लोगों में टीबी के संभावित संकेत मिले, जबकि 91.7 प्रतिशत संदिग्ध लोगों का मॉलिक्यूलर टेस्ट कराया गया।
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अध्ययन के अनुसार, हर एक लाख लोगों की स्क्रीनिंग में 520 टीबी मरीज मिले। एक मरीज की पहचान के लिए औसतन 192 लोगों की स्क्रीनिंग करनी पड़ी।
यह अध्ययन दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन, दिल्ली स्टेट टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम और द यूनियन टीबी विभाग से जुड़े शोधकर्ताओं ने किया है। इसे इंडियन जर्नल ऑफ ट्यूबरकुलोसिस में प्रकाशित किया गया है।
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शोधकर्ताओं के अनुसार, बिना लक्षण वाले लोगों में जांच की जरूरत महसूस न होना और काम की व्यस्तता स्क्रीनिंग में बड़ी बाधा रही। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं की भागीदारी और घर के नजदीक जांच सुविधा से लोगों की भागीदारी बढ़ी। स्क्रीनिंग उपकरण भी निर्धारित संचालन दिनों में केवल 3.5 प्रतिशत दिन बंद रहे।