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गांव वालों को नहीं पता था कि मस्जिद में लगा है आतंकियों का पैसा, एनआईए के खुलासे ग्रामीण सकते में

Mon, 15 Oct 2018 10:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पलवल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पलवल Updated Mon, 15 Oct 2018 10:13 PM IST
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villagers did not know that terrorist money is being used in the mosque
मस्जिद

एनआईए की ओर से हरियाणा के पलवल जिले में स्थित उटावड गांव की मरकजी मस्जिद में आतंकियों का पैसा लगा होने का खुलासा होने के बाद से ग्रामीण सकते में है। पहले जहां ग्रामीण इस मामले में सलमान की गिरफ्तारी और उसके टेरर फंडिंग में लिप्त होने के आरोपों को खारिज कर रहे थे, वहीं अब खुलकर नहीं बोल रहे हैं। 

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एनआईए सूत्रों के मुताबिक एजेंसी को विभिन्न माध्यमों से सूचनाएं मिली थी कि दिल्ली में अवांछित गतिविधियों के लिए धन आ रहा है। इसी आधार पर एनआईए ने अगस्त में ही मुकदमा दर्ज कर संदिग्ध लोगों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी। पुख्ता सबूतों के बाद 26 सितम्बर को दिल्ली से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें मूलत: उटावड निवासी सलमान भी शामिल था, जो पाकिस्तानी एवं दुबई में संदिग्धों के संपर्क में था। 
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दावा है कि आरोपी हाफिज के एनजीओ फला-ए-इंसानियत से फंड लेता था। सलमान की गिरफ्तारी के बाद जो तथ्य सामने आए थे, उन पर उटावड और आसपास के लोगों को विश्वास नहीं था, लेकिन रविवार को हुए ताजा खुलासे के बाद मस्जिद निर्माण से जुड़े और आसपास के गांवों के लोग हतप्रभ हैं। उनका कहना है कि जमीन ग्रामीणों ने दी थी, लेकिन मस्जिद निर्माण के लिए मोटी रकम सलमान ने दी थी। उन्हें लगा था कि सलमान दुबई में धंधा करता है तो गांव में मस्जिद निर्माण के लिए मोटी राशि देना को बड़ी बात नहीं है, लेकिन अब जब पता लगा कि मस्जिद के लिए दिया गया धन टेरर फंडिग के लिए आया था तो कई खुलकर नहीं बोल रहा है। 
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हालांकि पूर्व सरपंच आस मोहम्मद का अब भी दाव कर रहे हैं कि सलमान टेरर फंडिंग में लिप्त नहीं हो सकता। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि मस्जिद की भूमि का विवाद है। हो सकता है कि किसी ने खुफिया एजेंसी को गलत सूचना दी हो। इस मामले में फिलहाल वकीलों से कानूनी राय ली जा रही है। उल्लेखनीय है कि मरकजी मस्जिद की जांच के लिए एनआईए की टीम कई बार गांव आ चुकी है। पिछले दिनों मस्जिद के कार्यालय में छापा मारकर दस्तावेज जब्त किए थे।

ग्रामीण कह रहे लिया था चंदा
उटावड एवं आसपास के लोगों का दावा है कि मस्जिद नर्माण के लिए 84 गांवों से चंदा लिया गया था। मस्जिद में टेरर फंडिंग का पैसा लगा होने पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा।  सलमान के भाई यूसुफ व चचेरे भाई याकूब का कहना है कि उनके परिवार ने अपनी जमीन बेच कर मस्जिद का निर्माण कराया है।  

निर्माणाधीन अन्य मस्जिदों पर टिकी है निगाहें
सलमान का प्रकरण सामने आने के बाद से पलवल और नूंह जिले में स्थित पिछले चार वर्षों में बनी या निर्माणाधीन मस्जिदों पर खुफिया एंजेंसियों ने नजर रखनी शुरू कर दी थी। अब टेरर फंडिग के जरिए आई राशि का इस्तेमाल होने की पुष्टि होने पर एजेंसियां अन्य मस्जिदों की और बारीकी से जांच करेगी। उधर इलाके में बने पासपोर्टों और हर माह एक-दो बार विदेश दौरे करने वाले लोगों के बारे में भी पड़ताल की जा रही है।ट


स्थानीय पुलिस अभी चुप्पी साधे है
मस्जिद के संबंध में ताजा खुलासे के बाद स्थानीय पुलिस पूरी तरह चुप्पी साधे है। बहीन थाना प्रभारी रामदयाल का कहना है कि वे हालत पर नजर रखे हुए हैं। एनआईए ही इस मामले की जांच कर रही है और वह ही इस मामले में अधिकृत जानकारी दे सकती है।

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