मोबाइल के कारण किशोरों की आंखों से गायब हो रही नींद
- जीवनचर्या पर भी पड़ रहा असर, फोर्टिस अस्पताल का दावा
- दिल्ली-एनसीआर के 550 स्कूल गोइंग छात्रों पर किया शोध
विस्तार
मोबाइल और तकनीक से किशोरों के आंखों से नींद गायब हो रही है। रातों को इन्हें सही से नींद नहीं आती। नींद टूटने पर वाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल साइट्स पर नजर डालते हैं।
खराब नींद की वजह से उनकी दिनचर्या बिगड़ भी रही है। ऐसे किशोरों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह खुलासा फोर्टिस अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारिक विज्ञान विभाग द्वारा किए गए शोध में सामने आया है।
विभाग के निदेशक डॉ. समीर पारिख द्वारा दिल्ली-एनसीआर के 550 स्कूल गोइंग छात्रों के बीच शोध किया गया। इसमें उन्होंने पाया कि 22 फीसदी किशोर हमेशा रात में उठते हैं और अपना मोबाइल चेक करते हैं।
जबकि, 48 फीसदी कभी-कभार उठकर ऐसा करते हैं। जबकि 21 फीसदी किशोरों को फोन की वजह से उठना होता है और फिर मोबाइल चेक करते हैं।
क्लास के दौरान सो जाते हैं बच्चे
शोध में पाया गया कि 34 फीसदी किशोरों को कभी-कभी स्कूल में नींद आती है, जबकि 33 फीसदी को अक्सर नींद आती है। 9 फीसदी हमेशा क्लास के दौरान सो जाते हैं और 24 फीसदी को अक्सर जंभाई आती है।
सर्वे में शामिल किशोरों में 29 फीसदी पांच घंटे से कम सोते हैं और 25 फीसदी इनमें नींद की समस्या से पीड़ित हैं। इनमें 29 फीसदी किशोर रात में म्यूजिक के शौक के कारण हेडफोन लगाकर सो जाते हैं, जो इनकी आदत में शुमार है।
डॉ. पारिख कहते हैं कि किशोरों के जीवन में तकनीक अधिक घुस गया है। इससे बेड का समय बिगड़ रहा है और तकनीक की वजह से रात की नींद प्रभावित हो रही है। रात में अधिक देर तक जागते हैं और सुबह ज्यादा देर तक सोते हैं। फिर स्कूल और अन्य दिनचर्या प्रभावित होती है।