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उपहार अग्निकांड: सबूतों से छेड़छाड़ करने के मामले में सुशील और गोपाल अंसल को सात साल की कैद, दोनों पर 2.25 करोड़ का जुर्माना भी लगाया

Mon, 08 Nov 2021 04:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 08 Nov 2021 04:05 PM IST
सार

दिल्ली की एक अदालत ने उपहार अग्निकांड केस में सबूतों से छेड़छाड़ मामले में फैसला सुनाते हुए अंसल भाइयों को बड़ा झटका दिया है।

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Uphaar fire tragedy Delhi court awards 7-year jail terms to Sushil and Gopal Ansal in evidence tampering case court also impose 2 point 25 crore fine on each
उपहार अग्निकांड - फोटो : Social Media

विस्तार

उपहार अग्निकांड केस में दिल्ली की अदालत ने सबूतों से छेड़छाड़ करने के मामले में सुशील और गोपाल अंसल को सात साल कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पर 2.25 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कही ये बातें
सुशील अंसल और गोपाल अंसल ने कानून के शासन की महिमा को कमजोर किया है। उन्होंने न केवल दिल्ली की न्यायपालिका की संस्थागत अखंडता को क्षीण कर दिया बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन पर भी गंभीर रूप से चोट पहुंचाई है। ऐसे दोषियों के सुधार की संभावना नहीं है। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलनी चाहिए। उपहार केस के साक्ष्यों को नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराए गए अंसल बंधुओं सहित अन्य की सजा निर्धारण पर दिल्ली पुलिस व पीड़ितों ने अदालत के समक्ष उक्त तर्क रखा।
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पटियाला हाउस अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा के समक्ष उन्होंने कहा सुशील अंसल और गोपाल अंसल नाम के दोषियों से सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती। वे मुख्य मामले में भी दोषी ठहराए गए हैं और उनके खिलाफ कई अन्य आपराधिक मामले विचाराधीन हैं।
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इस मामले ने एक धारणा बनाई है कि अमीर और ताकतवर लोग किसी भी चीज से बच सकते हैं और वे न्यायिक व्यवस्था को अपने पक्ष में कर सकते हैं। अदालत के सम्मान के लिए इस धारणा को भी तोड़ना होगा। न्यायालय ऐसे गंभीर अपराध पर आंखें मूंद नहीं सकता।

दोषियों ने दिए थे ये तर्क
वहीं अंसल बंधुओं के अधिवक्ता ने दया की अपील करते हुए कहा उनकी आयु 80 वर्ष से ज्यादा है और वे परिवार में कमाने वाले एक मात्र सदस्य हैं। उनकी दोनों बेटियां अलग रहती हैं। इसके अलावा पत्नी की देखभाल करनी है। उसने दो हजार लोगों को रोजगार दिया है।


उन्होंने कहा पीड़ितों को 30 करोड़ रुपये मुआवजा दिया है। उनके इस तर्क पर पीड़ित एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा वे अभी अदालत को गुमराह कर रहे हैं। 

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