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खरीदारों को झटका, बिल्डर को देनी होगी धनराशि, यूपी रेरा की पीठ ने 57 मामलों में सुनाया फैसला
Wed, 07 Aug 2019 05:00 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 07 Aug 2019 05:00 AM IST
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यूपी रेरा से एम्स आरजी एंजल प्रमोटर्स बिल्डर के खरीदारों को झटका लगा है। पीठ ने खरीदारों को जीएसटी, लेबर सेस, अतिरिक्त मुआवजे की धनराशि देने का आदेश दिया है।
साथ ही बिल्डर को आदेश दिया है कि एक माह के अंदर धनराशि प्राप्त कर खरीदारों के फ्लैट की रजिस्ट्री करें। रेरा की पीठ दो के सदस्य बलविंदर कुमार ने बताया कि एम्स आरजी एंजल के गोल्फ एवेन्यू-2 के 57 खरीदारों ने शिकायत की थी।
उनका कहना था कि बिल्डर अवैध तरीके से धनराशि की मांग कर रहा है। बिल्डर जीएसटी, वैट, लेबर सेस, किसानों का अतिरिक्त मुआवजा, गैस कनेक्शन आदि के रूप में धनराशि मांगी है।
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वहीं बिल्डर ने बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट सभी अतिरिक्त धनराशि को सही ठहराया। आरडी पालीवाल के माध्यम से मामले को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास किया गया था। चार बैठक भी हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला।
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साथ ही बिल्डर को आदेश दिया है कि एक माह के अंदर धनराशि प्राप्त कर खरीदारों के फ्लैट की रजिस्ट्री करें। रेरा की पीठ दो के सदस्य बलविंदर कुमार ने बताया कि एम्स आरजी एंजल के गोल्फ एवेन्यू-2 के 57 खरीदारों ने शिकायत की थी।
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उनका कहना था कि बिल्डर अवैध तरीके से धनराशि की मांग कर रहा है। बिल्डर जीएसटी, वैट, लेबर सेस, किसानों का अतिरिक्त मुआवजा, गैस कनेक्शन आदि के रूप में धनराशि मांगी है।
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वहीं बिल्डर ने बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट सभी अतिरिक्त धनराशि को सही ठहराया। आरडी पालीवाल के माध्यम से मामले को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास किया गया था। चार बैठक भी हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला।
खरीदारों की तरफ से सीए की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। रेरा ने अपने सीए प्रवीन कुमार श्रीवास्तव से भी निष्पक्ष राय ली। सभी पक्ष सुनने के बाद खरीदारों को आदेश दिया गया है कि बिल्डर ने जीएसटी, वैट, लेबर सेस, किसानों का अतिरिक्त मुआवजा, गैस कनेक्शन आदि के रूप में जो धनराशि मांगी है, वह सही है।
खरीदारों को उसका भुगतान करना होगा। वहीं, बिल्डर को आदेश दिया गया है कि एक माह के अंदर बकाया भुगतान मिलने के बाद खरीदारों के पक्ष में फ्लैटों की रजिस्ट्री करनी होगी।
खरीदारों को उसका भुगतान करना होगा। वहीं, बिल्डर को आदेश दिया गया है कि एक माह के अंदर बकाया भुगतान मिलने के बाद खरीदारों के पक्ष में फ्लैटों की रजिस्ट्री करनी होगी।