यूपी के खेतिहर मजदूर भी गाजीपुर बॉर्डर पर डटा, दल में 20 महिलाएं व छह पुरुष व चार बच्चे शामिल
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शाहजहांपुर, यूपी से आई 80 वर्षीय रामकली ठीक से चल भी नहीं पाती हैं, लेकिन पिछले पंद्रह दिनों से वह गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के साथ डटी हुई हैं। रामकली का पूरा परिवार खेतिहर मजदूर है। उनका पूरा परिवार ट्रैक्टर ट्राली में सवार होकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचा तो वह भी अपने दल के साथ आ गईं। 26 मजदूरों और चार बच्चों को लेकर उनका दल यहां पहुंचा है। बॉर्डर पर आने वालों में ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। रामकली का कहना है कि किसी भी सरकार ने कभी किसानों की सुध नहीं ली। पहले उनके पास थोड़ी बहुत जमीन थी, लेकिन जरूरत पड़ने पर उनको जमीन बेचनी पड़ी और अब वह खुद कर्जे में दबे हैं। नए कानून से जब किसान ही खत्म हो जाएगा तो उनके जैसे मजदूरों का क्या होगा।
इसी दल में अपने परिवार के साथ गाजीपुर पहुंची रावधवा महिला कुंतीदेवी ने बताया कि इस साल उन्होंने अपने धान की फसल को बड़ी मुश्किल से 1100 रुपये क्वंटन में बेचा है। खाद, बीज, बिजली, डीजल सब कुछ तो महंगा है, लेकिन उनकी फसल के रेट बजाए बढ़ने के और घटते ही जा रहे हैं। सरकार को कम से कम फसल का एक दम फिक्स तो करना चाहिए कि कम से कम किसान उस रेट पर अपनी फसल बेच सके।
कुंती ने बताया कि उन पर ढाई लाख रुपये का कर्जा है। माधुरी कशवाहा नामक महिला ने भी पौने दो लाख कर्जा होने की बात की। मान सिंह ने बताया कि शाहजहांपुर से उनके दल में 20 महिलाएं 6 पुरुष और चार बच्चे आए हैं। जब सरकार कृषि कानून लेकर किसानों के भविष्य के लिए कोई कानून नहीं बनाते तब तक वह यहां से नहीं जाने वाले हैं।
एमएसपी के लिए अनाज व सब्जियों का सैंपल लेकर प्रदर्शन...
गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे कुछ किसान अनाज और सब्जियों के सैंपल लेकर सड़क पर प्रदर्शन करने लगे। डिस्पोजेबल प्लेट में इन किसानों ने दालों, चावल और सब्जियों के सैंपल रखे हुए थे। किसान वहां आए लोगों को बता रहे थे कि उन्होंने इस साल कौन सी दाल और अनाज या सब्जी किस रेट में बेची। किसानों का कहना था कि किसानों से सस्ता लेकर उनकी फसल को दस गुना ज्यादा महंगा बेचा जाता है। यदि यह सब उद्योगपतियों के हाथों में चला गया तो किसान की हालत और खराब हो जाएगा। सरकार को इन कृषि कानूनों को वापस लेकर तुरंत फसलों का एमएसपी तय कर देना चाहिए।
कड़कड़ाती ठंड ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, लेकिन हौसले अब भी बुलंद...
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के बीच राजधानी में पिछले तीन दिनों से गजब की ठंड पड़ रही है। ऐसे में किसान हाड़ कंपा देने वाली ठंड में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ठंड की वजह से पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ रही है, लेकिन सरकार दिल नहीं पसीज रहा। दिन में थोड़ी बहुत देर सोकर किसान अपनी नींद को पूरा कर रहे हैं। बुजुर्ग किसानों का कहना था कि ठंड से उनका हौंसला बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। उनका प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। ठंड की वजह से सभी किसानों ने अपने-अपने ट्रैक्टर की ट्रालियों पर प्लास्टिक की तिरपाल बांध ली है। रात इन ट्रैक्टर ट्रालियों में ही बिताई जाती है।
गाजीपुर बॉर्डर पर सज गई कुर्ता-पायजामा, बंडी-जैकेट और किसान टोपी व बिल्लों की दुकान...
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की बढ़ती भीड़ के बीच कुर्ता पायजामा, बंडी-जैकेट और किसान आंदोलन के लिए टोपी, बिल्लू और आईकार्ड की दुकानें भी सच गई हैं। मथुरा निवासी रामजीत कश्यप ने बताया कि पिछले कई दिनों से वह भारतीय किसान यूनियन से जुड़ी टोपी, कैप, बिल्ले और अन्य सामान की दुकान चला रहे हैं। रोजाना उनकी 400/500 रुपये की सेल हो रही है। कुर्ता पायजामा और बंडी जैकेट भी खूब खरीदी जा रही हैं।