स्किल इंडिया: आईआईटी, आईआईएम की लैब में चलेगी वोकेशनल क्लास, छात्रों को बनाया जाएगा हुनरमंद
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना-4 के तहत सत्र 2023 से कोई भी शिक्षण संस्थान जुड़ सकता है और बदलें में कमाई भी होगी। आईआईटी, आईआईएम, कॉलेजों और स्कूलों की लैब में अब खाली समय में ‘स्किल हब’ के रूप में वोकेशनल कोर्स की कक्षाएं चलेंगी।
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आईआईटी, आईआईएम, कॉलेजों और स्कूलों की लैब में अब खाली समय में ‘स्किल हब’ के रूप में वोकेशनल कोर्स की कक्षाएं चलेंगी। स्किल इंडिया के तहत स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थानों की लैब, शिक्षकों समेत अन्य संसाधनों का प्रयोग खाली समय में छात्रों को हुनरमंद बनाने में किया जाएगा। इसके लिए नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी) ने 720 कोर्स की पढ़ाई व ट्रेनिंग की मंजूरी भी दे दी है। खास बात है कि अपने संसाधनों का प्रयोग करने देने के बदले स्किल इंडिया इन शिक्षण संस्थानों को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना -4 के तहत बाकायदा पैसा भी देगी।
केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय देश के सभी शिक्षण संस्थानों के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना-4 में इस योजना को लेकर आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को स्कूली और उच्च शिक्षा के दौरान छात्रों को किताबी पढ़ाई के साथ उनके मनपसंद क्षेत्रों में वोकेशनल ट्रेनिंग के माध्यम से हुनरमंद बनाने को निर्देश दिया है। इसी के तहत शैक्षणिक सत्र 2023-24 से देश के सभी शिक्षण संस्थानों की लैब और संसाधनों का प्रयोग खाली समय में वोकेशनल कोर्स में किया जाएगा।
इससे छात्रों को स्कूली शिक्षा से ही वोकेशनल कोर्स के माध्यम से अपनी स्किल को री-स्किल और अपस्किल करने का मौका मिलेगा। इसलिए यदि किसी कारण से कोई छात्र 10वीं या 12वीं कक्षा के बाद बीच में पढ़ाई छोड़ता भी है तो वोकेशनल कोर्स से हुनरमंद होने के कारण वह अपना कामधंधा या रोजगार से आसानी से जुड़ सकेगा।
इन शिक्षण संस्थानों को मंजूरी
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय, सरकारी और निजी स्कूल, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर,कॉलेज समेत अन्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन सभी शिक्षण संस्थानों में खाली समय में जब लैब और संसाधनों का प्रयोग नहीं हो रहा होगा, तब वोकेशनल कोर्स के माध्यम से उन लैब से जुड़े कोर्स करवाए जा सकेंगे। शिक्षण संस्थानों के ही शिक्षक यह वोकेशनल कोर्स करने में मदद करेंगे। उन शिक्षकों को इस काम के बदले अतिरिक्त वेतन का फैसला संबंधित शिक्षण संस्थान खुद करेंगे। हालांकि, स्किल इंडिया इसके बदले बाकायदा इन शिक्षण संस्थानों को पैसा देगा।
इस प्रकार के कोर्स
शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, कंप्यूटर आपरेटर, लैब अस्सिटेंट, ऑफिस अटेंडेंट जैसे कोर्स से लेकर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कोर्स भी करवाए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय एरिया के कलाकारों, बुनकरों, शिल्पकारों समेत अन्य को भी उनके विषय से जुड़े कोर्स करवाने के लिए भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि छात्र अपनी पसंद के आधार पर स्किल को चुन सकें।
डिग्री और सर्टिफिकेट में क्रेडिट जुड़ेंगे
नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी) ने जिन 720 कोर्स की पढ़ाई व ट्रेनिंग की मंजूरी दी है, वह 200 घंटे से लेकर 600 घंटे के क्रेडिट वाले हैं। इसमें छात्र जितने घंटे के कोर्स करेगा, उसके क्रेडिट उसके स्कूली सर्टिफिकेट और उच्च शिक्षा की डिग्री में भी जुड़ेंगे। इसके लिए सीबीएसई, प्रदेश शिक्षा बोर्ड, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद समेत अन्य हितधारक मदद करेंगे।