'खालिद और अनिर्बन को करना होगा सरेंडर'
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देश विरोधी नारे लगाने के आरोपी उमर खालिद द्वारा सुरक्षा की मांग के लिए दायर की गई याचिका की सुनवाई पर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उमर और अनिर्बन भट्टाचार्य को आत्म समर्पण करना ही होगा और उन्हें कानून की प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई कल भी जारी रहेगी।
इस बीच कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के जेएनयू में प्रवेश और आरोपी छात्रों की गिरफ्तारी पर निर्देश देने संबंधी याचिका को अस्वीकार कर दिया है। बता दें कि आज ही उमर खालिद सहित पांच छात्रों ने आत्मसर्पण के लिए सुरक्षा की मांग संबंधी याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की थी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उन्हें किसी भी हालत में समर्पण करने की प्रक्रिया से मुक्त नहीं किया जा सकता। इस पर बचाव पक्ष की ओर से समर्पण करने वाली जगह के बारे में दलील दी गई जिस पर कोर्ट ने कल सुनवाई करने का आदेश दे दिया।
स्पष्ट है कि कोर्ट ने पुलिस द्वारा आरोपी छात्रों की गिरफ्तारी पर किसी भी तरह की रोक लगाने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें पुलिस के सामने समर्पण करना ही होगा।
पहले कर रहे थे गिरफ्तारी का विरोध
बता दें कि पहले आरोपी छात्रों ने चुनौती वाले अंदाज में कहा था कि पुलिस अगर उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है तो कर ले। वहीं दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने आरोपी छात्रों से जांच का हिस्सा बनने और अपनी बेगुनाही साबित करने को कहा।
मालूम हो कि दिल्ली पुलिस पिछले दो हफ्ते से उमर खालिद और पांच आरोपियों को तलाश रही है। उमर की तलाश में दिल्ली पुलिस ने जम्मू कश्मीर सहित यूपी, उत्तराखंड और बिहार में छापेमारी भी की है।
इस बीच रविवार रात को उमर खालिद अपने समर्थकों सहित जेएनयू में प्रकट हो गया और अपनी बेगुनाही की दलील देने के साथ पुलिस, सरकार और मीडिया पर गुस्सा निकाला।
पुलिस ने आत्मसमर्पण करने के लिए उन्हें सोमवार सुबह तक का वक्त दिया था मगर आरोपियों ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना है तो कर ले।
दिल्ली पुलिस को नहीं पसंद सरकार के वकील
इस बीच दिल्ली पुलसि ने एलजी नजीब जंग को चिट्ठी लिख कर मांग की है कि दिल्ली सरकार ने इस मामले में जिन वकीलों की नियुक्ति की है उन पर उन्हें भरोसा नहीं है।
साथ ही पुलिस ने अपनी ओर से चार नामों की सिफारिश करते हुए उन्हें वकील नियुक्ति करने की मांग की है। उधर कन्हैया के बेल की सुनवाई के मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
अब कन्हैया की बेल पर बुधवार को सुनवाई होगी। उधर बेगुसराय में रहने वाले कन्हैया के परिजनों ने सोमवार को तिहाड़ जेल में उससे मुलाकात की।
परिजनों का कहना है कि तिहाड़ में कन्हैया को मिल रही सुरक्षा से वह संतुष्ट है लेकिन, जेल से बाहर उसकी सुरक्षा को लेकर वो अभी भी चिंतित है।
खालिद ने ऐसे दी थी अपनी सफाई
बता दें कि अफजल शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में देशविरोधी नारे लगाने के आरोपी सैयद उमर खालिद रविवार देर रात छात्रों के बीच जेएनयू पहुंचा तो लाल सलाम, लाल सलाम टू कामरेड के नारों से कैंपस गूंज उठा था।
उमर को सुनने के लिए दो हजार से अधिक छात्र और शिक्षक भी मौजूद रहे। उमर ने यहां छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि, साथियों मेरा नाम उमर खालिद जरूर है, लेकिन मैं आतंकवादी नहीं हूं।
सबसे पहले कई दिनों से उन छात्रों और शिक्षकों को धन्यवाद और मुबारक देता हूं, जोकि हमारे साथ खड़े थे। यह लड़ाई हम पांच -छह लोगों की नहीं, बल्कि पूरे जेएनयू विवि की है। अब यह देशभर के विश्वविद्यालयों की लड़ाई है कि आने वाले दिनों में हमारा समाज कैसा होगा।
साथियों पिछले दस दिनों में अपने बारे में ऐसी कुछ बातें जानने को मिली, जोकि मुझे खुद पता नहीं थी। मुझे पता चला कि मैं दो बार पाकिस्तान होकर आया लेकिन मेरे पास पासपोर्ट नहीं है। इसका गुब्बारा फटा तो इसके बाद बताया गया कि मैं मास्टर माइंड हूं।
वैसे जेएनयू स्टूडेंट हेज वंडरफूल माइंड ...। फिर आया कि मैंने मौलाना हाफिज सैय्यद को पाकिस्तान फोन किया। यही नहीं गल्फ, पाकिस्तान में फोन किए। मीडिया पर कटाक्ष िकया।
करते हुए कहा कि शर्म तो इन लोगों को आती नहीं। मीडिया ने आदिवासी को माओवादी और मुस्लिम को आतंकवादी करार दिया। बहुत लोग बेबस होते हैं, क्योंकि उनके पास बोलने वाला कोई नहीं होता है।
लेकिन भाई साहब आप लोग गलत जगह भिड़ गए। जेएनयू वाले एक-एक मीडिया चैनल को मजा चखाएंगे। आपको जवाबदेही तय करनी होगी।