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मरीजों की पत्नियों ने पेश की मिसाल, किडनी देकर बचाई जिंदगी
Updated Sun, 07 Sep 2014 11:15 PM IST
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सफल किडनी प्रत्यारोपण की वजह से दिल्ली और झारखंड के दो परिवार एक-दूसरे से न सिर्फ नजदीक आए बल्कि दोनों परिवारों के घर में खुशियां भी एक साथ आई।
दो वर्ष से डायलिसिस पर चल रहे दोनों मरीजों की पत्नियों ने एक-दूसरे के पति को किडनी देकर उनकी जिंदगी बचाई। दोनों मरीज और किडनी दान करने वाली दोनों महिलाएं पूरी तरह से स्वस्थ हैं। सभी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
दिल्ली के बीएल कपूर सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में झारखंड के बोकारो निवासी एस.बी.राम (61) को दिल्ली के संत राम (58) की पत्नी गंगा देवी ने किडनी दी। जबकि दिल्ली के संत राम को बोकारो के एस.बी.राम की पत्नी उर्मिला ने किडनी देकर जान बचाई।
अगस्त के आखिरी सप्ताह में सर्जरी करके दोनों को नई जिंदगी और परिवार को खुशियां दीं। चारों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और सभी पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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अस्पतला के नेफ्रोलॉजी विभाग में सीनियर कंसलटेंट एवं निदेशक डॉ. सुनील प्रकाश ने बताया कि दस घंटे की सफल सर्जरी और किडनी प्रत्यारोपण के कार्य को पूरा किया गया।
इस टीम में चार प्रत्यारोपण सर्जन, दो किडनी रोग विशेषज्ञ, चार एनेस्थीसिया के चिकित्सकों के अलावा चार नर्सों को शामिल किया गया था।
डॉ. प्रकाश ने बताया कि दोनों मरीजों को मधुमेह था, इसलिए उसे नियंत्रित करना और खून में प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करना भी चुनौती थी।
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दो वर्ष से डायलिसिस पर चल रहे दोनों मरीजों की पत्नियों ने एक-दूसरे के पति को किडनी देकर उनकी जिंदगी बचाई। दोनों मरीज और किडनी दान करने वाली दोनों महिलाएं पूरी तरह से स्वस्थ हैं। सभी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
दिल्ली के बीएल कपूर सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में झारखंड के बोकारो निवासी एस.बी.राम (61) को दिल्ली के संत राम (58) की पत्नी गंगा देवी ने किडनी दी। जबकि दिल्ली के संत राम को बोकारो के एस.बी.राम की पत्नी उर्मिला ने किडनी देकर जान बचाई।
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अगस्त के आखिरी सप्ताह में सर्जरी करके दोनों को नई जिंदगी और परिवार को खुशियां दीं। चारों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और सभी पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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अस्पतला के नेफ्रोलॉजी विभाग में सीनियर कंसलटेंट एवं निदेशक डॉ. सुनील प्रकाश ने बताया कि दस घंटे की सफल सर्जरी और किडनी प्रत्यारोपण के कार्य को पूरा किया गया।
इस टीम में चार प्रत्यारोपण सर्जन, दो किडनी रोग विशेषज्ञ, चार एनेस्थीसिया के चिकित्सकों के अलावा चार नर्सों को शामिल किया गया था।
डॉ. प्रकाश ने बताया कि दोनों मरीजों को मधुमेह था, इसलिए उसे नियंत्रित करना और खून में प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करना भी चुनौती थी।