Delhi: खाली प्लॉट में भरे पानी में डूबने से दो छात्रों की मौत, 3 साल से है जलभराव; एक साल पहले एक की गई थी जान
प्रेम नगर के रानीखेड़ा गांव में बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। इस दौरान उनकी गेंद जलभराव में चली गई। जिसे निकालने के दौरान दो बच्चे डूब गए। जिससे उनकी मौत हो गई।
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प्रेम नगर के रानीखेड़ा बस डिपो के पास शुक्रवार शाम खाली प्लॉट में भरे पानी में डूबने से 11वीं के दो छात्रों की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि बच्चे क्रिकेट खेलते समय पानी में गिर गए थे। वहीं, पुलिस का कहना है कि मयंक (17) व दिव्यांश (17) नहाने गए थे। पुलिस लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है।
पुलिस के अनुसार, मूलरूप से सीतामढ़ी निवासी रंजीत कुमार ने बताया कि वे प्रेम नगर तीन के बृज विहार में रहते हैं। शाम छह बजे मयंक कुछ दोस्तों के साथ खाली प्लॉट में क्रिकेट खेलने के लिए गया था। करीब शाम सात बजे उन्हें बेटे के डूबने की जानकारी मिली। मौके पर पहुंचे तो आसपास के लोगों ने मयंक व दिव्यांश को पानी से निकाल लिया था। वे दोनों को तुरंत संजय गांधी अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वहीं, दिव्यांश के पिता प्रमोद तोमर ने बताया कि वे परिवार के साथ अगर नगर स्थित मीठा पानी काॅलोनी में रहते हैं। वे एक फैक्टरी में काम करते हैं और मूलरूप से ओरैया के रहने वाले हैं। दिव्यांश घर के पास स्थित सरकारी स्कूल के 11वीं में पढ़ता था। शुक्रवार को बेटा कुछ दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने गया था। कुछ ही देर बाद उसके पानी में डूबने की सूचना मिली।
तीन साल से भरा हुआ है पानी
लोगों ने बताया कि तीन साल से यहां पानी भरा हुआ है। बारिश के दिनों में जलस्तर काफी बढ़ जाता है। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की जा चुकी है। इसके बावजूद पानी हटाने के लिए कोई पहल नहीं की गई है।
एक साल पहले भी हुई थी बच्चे की मौत
लोगों ने बताया कि बारिश के दिनों में यहां जलभराव होने के बाद बच्चों के डूबने का खतरा बढ़ जाता है। खाली प्लॉट में बच्चे खेलने आते हैं। प्लॉट में कहीं गहरा गड्ढा है। इसमें चले जाने से बच्चे डूब जाते हैं। एक साल पहले एक बच्चे की मौत हो चुकी है। शिकायत के बावजूद कोई कदम नहीं उठाने से फिर से हादसा हुआ है। खाली जमीन में चहारदीवारी कर दी गई थी, लेकिन समय बीतने के साथ कई जगहों पर चहारदीवारी टूट चुकी है। इससे बच्चे उस क्षेत्र में भी घुस जाते हैं, जहां डूबने का खतरा रहता है। कई बार बच्चों को डूबने से बचाया भी गया है।
डीडीए ने वर्ष 2007 में प्लॉट को डीएसआईआईडीसी को सौंप दिया था
डीडीए का कहना है कि जहां पर हादसा हुआ, वह प्लाॅट 2007 में डीएसआईआईडीसी को सौंप दिया गया था। घटना को दुखद और दर्दनाक बताते हुए डीडीए ने पीड़ित परिवार के लिए गहरी संवेदना है। अधिकारियों का कहना है कि प्लॉट करीब 150 एकड़ का है। इस पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित होना है। इसी साल जनवरी में उपराज्यपाल ने इसकी घोषणा भी की थी। अभी तक यहां निर्माण नहीं शुरू हो सका है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि बच्चे नहाने के लिए गए थे। गहरे पानी में जाने से दोनों डूब गए। पुलिस को रात में संजय गांधी अस्पताल से घटना की जानकारी मिली थी। पुलिस लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर जांच कर रही है। - गुर इकबाल सिंह सिद्धू, पुलिस उपायुक्त, रोहिणी जिला