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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   DTC fought a legal battle for 32 years over 67; fined 1 lakh.

Delhi NCR News: 67 रुपये के लिए डीटीसी ने 32 साल लड़ा मुकदमा, लगा एक लाख रुपये जुर्माना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 10:13 PM IST
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हाईकोर्ट ने कहा, मामूली राशि के दावे को लेकर लंबे समय तक मुकदमा लड़ना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने महज 67 रुपये के विवाद को 32 साल तक खींचने पर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 2 सितंबर को डीटीसी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इतनी मामूली राशि के दावे को लेकर लंबे समय तक मुकदमा लड़ना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इससे सार्वजनिक धन की अनावश्यक बर्बादी हुई।
अदालत ने जुर्माने की एक लाख रुपये की राशि को तीन हिस्सों में बांटने का निर्देश दिया है। इसमें 25 हजार रुपये दिल्ली हाईकोर्ट कानूनी सेवा समिति, 50 हजार रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष और 25 हजार रुपये बस कंडक्टर राजेंद्र प्रसाद को दिए जाएंगे। अदालत ने डीटीसी को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वह जुर्माने की राशि उस अधिकारी से वसूल करे, जो इस छोटे से विवाद को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार था।
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मामला वर्ष 1994 का है। डीटीसी के बस कंडक्टर राजेंद्र प्रसाद पर यात्रियों से बिना टिकट जारी किए 67 रुपये लेने का आरोप लगा था। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई और वर्ष 1996 में उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। प्रसाद ने डीटीसी के प्रबंध निदेशक के समक्ष अपील की। इसके बाद उन्हें बहाल तो कर दिया गया, लेकिन बकाया वेतन नहीं दिया गया।
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बकाया वेतन के लिए प्रसाद ने औद्योगिक न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया। न्यायाधिकरण ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए माना कि उन्हें दी गई सजा अवैध और निराधार थी। उसने डीटीसी को 1996 से 1998 तक दो साल का बकाया वेतन देने का निर्देश दिया। डीटीसी ने वर्ष 2004 के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 2005 में न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला वर्षों तक लंबित रहा।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अब डीटीसी की याचिका खारिज करते हुए मुकदमे के तौर-तरीके पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संस्था होने के नाते डीटीसी को मुकदमेबाजी में समय और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए थी।
फैसले का असर

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की याचिका पूरी तरह खारिज कर दी। फैसले के बाद बस कंडक्टर को बर्खास्तगी के दो वर्षों का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि अब तक उन्हें बहाल नहीं किया गया है तो बहाली के साथ उन्हें बकाया अवधि का वेतन भी डीटीसी को देना होगा।


अदालतों पर बोझ

नेशनल ज्यूडिशियल ग्रिड के मुताबिक, दिल्ली की सभी जिला अदालतों में पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में भी 66 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। हाईकोर्ट में 10 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की संख्या करीब 15 लाख तक पहुंच गई है। पुराने मामलों के लगातार लंबित रहने से दिल्ली की अदालतों पर बोझ बढ़ता जा रहा है।
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