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मां से बदला लेने को मासूम पर तेजाब डालकर कूड़े में फेंका, इलाज को भटक रहा गरीब पिता

Wed, 28 Dec 2016 10:11 AM IST
जितेंद्र राठी/अमर उजाला, गुरुग्राम
जितेंद्र राठी/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Wed, 28 Dec 2016 10:11 AM IST
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Two and a half years, putting it in the trash thrown acid on innocent, eyes spilled arise sight
एस‌िड अटैक के बाद झुलसा मासूम - फोटो : अमर उजाला

जान से मारने की नीयत से अपहरण कर उस पर तेजाब छिड़ककर कूड़े के ढ़ेर में फेंक दिए गए मासूम को अब इलाज की दरकार है। उसका पिता आर्थिक तंगी के चलते बच्चे का इलाज कराने में मजबूर है। मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचे दुखी पिता ने अपना दुखड़ा सुनाया तो सभी की आंखे छलक उठी।

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मूल रूप से यूपी के जिला उन्नाव के गांव हसनापुर के रहने वाले यमुना प्रसाद करीब एक साल पहले गुरुग्राम में परिवार के साथ रोजगार की तलाश में आए थे। यहां शांति नगर में मकान किराये पर लेकर राज मिस्त्री का काम करना शुरू किया। परिवार का गुजारा आराम से चल रहा था। 12 दिसंबर को अचानक उसकी जिंदगी में भूचाल आ गया।
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ढाई वर्षीय बेटा आदित्य राज गली में खेलते समय अचानक गुम हो गया। शिकायत पुलिस से की गई। दो दिन बाद वह 14 दिसंबर को ओमनगर में कूड़े के ढेर में पड़ा मिला था। इसके बाद आरोपी की तलाश शुरू हुई तो पड़ोस में ही रहने वाले गोविंद उर्फ रामेदव को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

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आदित्य का आधा चेहरा पूरी तरह से झुलसा हुआ है

Two and a half years, putting it in the trash thrown acid on innocent, eyes spilled arise sight
एसिड अटैक

रामदेव ने खुलासा किया कि उसने बच्चे की मां द्वारा उसकी बहन को अपशब्द कहने का बदला लेने के लिए बच्चे का अपहरण कर उस पर तेजाब छिड़क दिया तथा उसे मरा हुआ समझकर फेंक दिया था। पुलिस के प्रयास से आरोपी पकड़ा जा चुका है। 

लेकिन अब आदित्य के पिता के सामने उसके इलाज की समस्या खड़ी हो गई है। आदित्य का आधा चेहरा पूरी तरह से झुलसा हुआ है। हाथ व छाती में भी तेजाब ने गहरे जख्म दे दिए हैं।

यहां नागरिक अस्पताल में इस तरह के मरीज के लिए इलाज की व्यवस्था नहीं है। सफदरजंग अस्पताल में उसके बच्चे को रेफर किया गया है, लेकिन वहां वह मजबूरन बच्चे के साथ रह नहीं सकता। 

उसकी पत्नी आठ माह की गर्भवती है। ऐसे में उसका घर पर भी रहना जरूरी है। वहीं, सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा इलाज के लिए दवाइयां बाहर से लिखी जाती हैं, जिनका खर्चा भी वह वहन नहीं कर सकता है। ऐसे में पीड़ित पिता असमंजस की स्थिति में मदद की गुहार लगाता घूम रहा है। 

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