राजधानी में बंद करें गैर-पंजीकृत ई रिक्शा संचालन
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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को राजधानी की सड़कों पर गैर पंजीकृत ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही ई-रिक्शा दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए बीमा पॉलिसी तैयार करने को कहा है।
अदालत ने यह निर्देश सरकार के खिलाफ दायर अदालत की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत ने पहले ही बिना पंजीकरण के चलने वाली ई-रिक्शा पर रोक लगा रखी है।
बावजूद इसके सभी नियम कानून का उल्लंघन कर ई-रिक्शा चल रही है। प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई 14 मार्च तय कर दी। सरकार को इस दिन अपनी नीति पेश करने का निर्देश दिया है।
पीड़ित को किसी भी प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं
न्यायमूर्ति जेआर मिड्डा ने ई-रिक्शा मालिकों को निर्देश दिया कि वे दुर्घटना के शिकार लोगों को मुआवजा प्रदान करने की दिशा में तीसरे पक्ष के बीमा कवर लें।
अदालत ने सरकार को भी इस मुद्दे पर निष्कर्ष निकालने का निर्देश देते हुए कहा कि वर्तमान में ई-रिक्शा से दुर्घटना होने पर पीड़ित को किसी भी प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
ऐसा मात्र इस कारण हो रहा है, क्योंकि राजधानी में अधिकांश ई-रिक्शा बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। ऐसे में बिना पंजीकरण के चलने वाले ई-रिक्शा पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए।
अभी तक मात्र 31 ई-रिक्शा को लाइसेंस प्रदान किया गया है
याची के अधिवक्ता सुग्रीव दुबे ने अदालत को बताया कि अभी तक मात्र 31 ई-रिक्शा को लाइसेंस प्रदान किया गया है। अन्य सभी गैरकानूनी रूप से चल रहे हैं।
वहीं, दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि जो ई-रिक्शा चालक तय नियमों का पालन कर रहे हैं, उनको पंजीकृत किया जा रहा है और अन्य को जब्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग आज तक करीब 4000 ई-रिक्शा के लिए लाइसेंस जारी कर चुका है।
वहीं अवैध रूप से चलने वाले 15000 ई-रिक्शा को जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा गैरकानूनी रूप से चलने वाले 16000 ई-रिक्शा मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।