ट्रांसजेंडर बच्चों को स्कूलों में मिलेगा आरक्षण
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आम बच्चों की तरह ट्रांसजेंडर बच्चों का भी स्कूल जाने का सपना अब पूरा हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में ट्रांसजेंडर बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाएगी। राज्यपाल नजीब जंग ने नोटीफिकेशन जारी करते हुए कहा है इन बच्चों को भी शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत स्कूलों में पढ़ने का अधिकार है। इसलिए अब दिल्ली के स्कूलों में इनके लिए सीटें आरक्षित होंगी।
गौरतलब है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 के मुताबिक सभी बच्चों को शिक्षा देना राज्य का अनिवार्य दायित्व है। अपने आदेश में राज्यपाल ने कहा है कि सभी ट्रांसजेंडर बच्चों को शिक्षा के अधिकार के अनुसार सुविधाहीन श्रेणी में रखा जाएगा। डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन को निर्देश देते हुए राज्यपाल ने दिल्ली के सभी स्कूलों में इन बच्चों का एडमिशन सुनिश्चित करने को कहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी अपने आवेदन फॉर्म में ट्रांसजेंडर के लिए थर्ड जेंडर का विशेष्ा कॉलम बनाया था। इसके साथ ही कैंपस में उनके लिए आरक्षण की भी व्यवस्था की गई थी। दिल्ली के स्कूलों में भी ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षण का फैसला इसी निर्णय प्रभावित दिखता है।
25 फीसदी दिया जाएगा आरक्षण
इस नोटीफिकेशन के तहत स्कूलों में ट्रांसजेंडर बच्चों को 25 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। डीओई पद्मनी सिंगला ने बताया कि इससे पहले इस प्रकार का आरक्षण अनाथ बच्चों को भी दिया जा चुका है। स्वास्थ विभाग द्वारा ऐसे बच्चों को सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा जिसके आधार पर उनका एडमिशन संभव होगा।
2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल 4.9 लाख ट्रांसजेंडर हैं। जहां राष्ट्रीय साक्षरता दर 74 फीसदी है, वहीं ट्रांसजेडर वर्ग में यह दर मात्र 46 फीसदी ही है।
नाज फांउडेशन की कार्यकारी निदेशन अंजलि गोपालन ने बताया कि यह खुशी की बात कि सरकार ट्रांसजेंडरों को शिक्षा का अधिकार दे रही है। लेकिन इसके बावजूद हमें ट्रांसजेंडर के प्रति लोगों का नजरिया भी बदलना पड़ेगा क्योंकि, ज्यादातर ट्रांसजेंडर बच्चे इसलिए स्कूल छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें आम बच्चों द्वारा चिढ़ाया जाता है।