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यहां सिर्फ आकाओं को खुश करने में लगी है ट्रैफिक पुलिस

Sat, 28 Nov 2015 05:46 PM IST
मयंक तिवारी /अमर उजाला, गुड़गांव
मयंक तिवारी /अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 28 Nov 2015 05:46 PM IST
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traffic police is only trying to make happy to their boses

कार फ्री डे, जीरो टॉलरेंस डे और जीरो स्ट्रीट पार्किंग कैंपेन...। यह साइबर सिटी की पुलिस के अभियान हैं। आम लोगों को इनमें से सिर्फ कार फ्री डे के बारे में थोड़ी जानकारी है।

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इन दिनों के बहाने पुलिस सिर्फ चालान काटती है, टारगेट पूरा करती है, रस्म अदा करती है और फिर अपने ऑफिस या घर चली आती है। पुलिस का मकसद जागरूकता पैदा करना नहीं बल्कि सिर्फ चालान काटना रह गया है।
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शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बीडी अहमद व संजीव सचदेव की खंडपीठ द्वारा यातायात पुलिस पर की गई सख्त टिप्पणी यहां की पुलिस पर सटीक बैठती है।
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जिसमें दोनों जजों ने कहा था कि यातायात पुलिस कांस्टेबल यातायात को संभालने की अपेक्षा पेड़ों के पीछे खड़े होकर उल्लंघन करने वालों को पकडने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं, ताकि जुर्माने संबंधित लक्ष्य को पूरा किया जा सके।

यही कारण है कि जगह-जगह जाम लगा रहता है और यातायात प्रबंधन पूरी तरह से विफल है। वाकई यही हाल साइबर सिटी में भी है। यहां जनता जाम से त्राहि-त्राहि कर रही होती है और पुलिसकर्मी चालान काटने में व्यस्त रहते हैं।

कमिश्ररी की पुलिस की ओर से ट्रैफिक व्यवस्था के नाम पर तरह-तरह के अभियान चलाने का दिखावा हो रहा है। जो महज एक इलाके में हो कर रह जाती है। चाहे वह राहगीरी हो या कार फ्री डे। गुडग़ांव में रहने वाली आधी जनता को पता ही नहीं कि जीरो स्ट्रीट अभियान है क्या।

इनके नाम पर पुलिस सिर्फ जनता से पैसा ऐंठ रही है। कोई जागरूकता अभियान नहीं चल रहा है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अभय सिंह कहते हैं कि पुलिस को ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।

सिर्फ चालान काटना ही समाधान नहीं है। पहले नियम तोडने वालों को प्यार से समझाएं, उन्हें जानकारी दें कि क्या सही और क्या गलत है। इसके बाद चालान पर जोर दे।


-सप्ताह में एक दिन होने वाले कार फ्री डे पर कभी 3000 तो कभी 1000-1ी500 लोगों के चालान होते हैं।
-एक माह में एक बार होने वाले जीरो टॉलरेंस डे पर तो एक दिन में 16 हजार चालान हुए थे।
-रोजाना चलने वाले जीरो स्ट्रीट पार्किंग ड्राइव में औसतन 600-700 लोगों के चालान काटे जा रहे हैं।
-गुडग़ांव पुलिस पूरे जिले में औसतन हर रोज करीब 1500 लोगों के चालान काट देती है।

सवाल
-इतने अभियानों के बावजूद एक भी गली अवैध पार्किंग से मुक्त नहीं हो पाई।
-एक भी सड़क जाम से मुक्त नहीं हुई। एक्सप्रेसवे पर तो रोजाना जाम रहता है।
-किसी भी सड़क पर प्रदूषण कम नहीं हुआ। चौराहों पर खड़ा होना मुश्किल है।
-चालान काटकर पैसा लेने भव से कैसे कोई जागरूक हो जाएगा।

समाधान
-पहले चालान नहीं जागरूकता पर दिया जाए जोर।
-सड़कों के किनारे जगह-जगह पार्किंग बनें, बाजारों में पार्किंग हो।
-ट्रैफिक पुलिसकर्मी बढ़ाए जाएं, दिल्ली की तुलना में एक चौथाई भी नहीं हैं।
-अच्छा सार्वजनिक परिवहन हो, ताकि लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करें।

साइबर सिटी के लोगों में ट्रैफिक सेंस पैदा करने के लिए यह अभियान चलाया जाता है।
-दलबीर सिंह, डीसीपी ट्रैफिक गुडग़ांव।

कितनी हैं गाडिय़ां
-ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक रोजाना शहर में 550 नई गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है। जिनमें से 111 भारी वाहन होते हैं। शहर में इस समय 7.65 लाख गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन है।
-गुडग़ांव में आठ जगहों से ट्रैफिक की एंट्री है। बाहर से आने वालों को मिला दिया जाए तो 11 लाख से अधिक गाडिय़ां सड़कों पर घूमती रहती हैं।

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