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ट्रांसजेंडरों की गिरफ्तारी के लिए एसओपी बनाने के निर्देश : दिल्ली हाईकोर्ट
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- अदालत ने विधि छात्रा की याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस से जवाब मांगाॉ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने के लिए उचित कदम उठाएं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने एक विधि छात्रा की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने सरकार को इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशानिर्देशों पर भी विचार करने को कहा। याचिकाकर्ता तारन चंदना ने याचिका में कहा कि दिल्ली पुलिस के पास महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की गिरफ्तारी के लिए स्थायी आदेश मौजूद हैं, लेकिन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कोई एसओपी नहीं है। उन्होंने बताया कि मई में एनएचआरसी ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी, हिरासत, तलाशी, पूछताछ और जेल भेजने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए व्यापक एसओपी बनाने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए थे। हालांकि, दिल्ली के लिए अभी तक ऐसी कोई एसओपी या दिशानिर्देश नहीं बनाए गए हैं। इस पर खंडपीठ ने अधिकारियों को एनएचआरसी के दिशानिर्देशों के अनुपालन में उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। याचिका में कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कोई एसओपी न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मई 2025 में एक प्राथमिकी के तहत तीन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी और हिरासत के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने के लिए उचित कदम उठाएं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने एक विधि छात्रा की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने सरकार को इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशानिर्देशों पर भी विचार करने को कहा। याचिकाकर्ता तारन चंदना ने याचिका में कहा कि दिल्ली पुलिस के पास महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की गिरफ्तारी के लिए स्थायी आदेश मौजूद हैं, लेकिन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कोई एसओपी नहीं है। उन्होंने बताया कि मई में एनएचआरसी ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गिरफ्तारी, हिरासत, तलाशी, पूछताछ और जेल भेजने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए व्यापक एसओपी बनाने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए थे। हालांकि, दिल्ली के लिए अभी तक ऐसी कोई एसओपी या दिशानिर्देश नहीं बनाए गए हैं। इस पर खंडपीठ ने अधिकारियों को एनएचआरसी के दिशानिर्देशों के अनुपालन में उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। याचिका में कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कोई एसओपी न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मई 2025 में एक प्राथमिकी के तहत तीन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था।
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