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Delhi NCR News: ट्रेड यूनियनों का जेल भरो सत्याग्रह, हजारों मजदूरों ने दी गिरफ्तारियां
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फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
गुड़गांव। देशव्यापी जेल भरो सत्याग्रह के आह्वान पर सोमवार को मजदूरों और कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े इन श्रमिकों ने डीसी कार्यालय पर धरना दिया और अपनी गिरफ्तारियां दीं। यह प्रदर्शन केंद्र एवं राज्य सरकार की मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ था।
प्रदर्शन के दौरान केंद्र एवं राज्य सरकार की मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। ट्रेड यूनियन काउंसिल के बैनर तले यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। विरोध प्रदर्शन के लिए एक अध्यक्ष मंडल का गठन किया गया। कई वक्ताओं ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार के अवसर लगातार कम किए जा रहे हैं। ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वक्ताओं ने चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की। उन्होंने सभी मजदूरों को स्थायी रोजगार देने की बात कही। स्कीम वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग उठाई गई। उद्योगों में ठेका प्रथा समाप्त करने और सरकारी विभागों में कार्यरत सभी कुशल कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग की गई।
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मांग-पत्र में सभी श्रमिकों के लिए 42,000 रुपये प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की बात कही गई। मनरेगा को मजबूत कर प्रतिवर्ष 200 दिन रोजगार और कम से कम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी देने की मांग की गई। ट्रेड यूनियन काउंसिल के संयोजक अनिल पवार ने कहा कि मजदूरों की एकता और संघर्ष से उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुड़गांव। देशव्यापी जेल भरो सत्याग्रह के आह्वान पर सोमवार को मजदूरों और कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े इन श्रमिकों ने डीसी कार्यालय पर धरना दिया और अपनी गिरफ्तारियां दीं। यह प्रदर्शन केंद्र एवं राज्य सरकार की मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ था।
प्रदर्शन के दौरान केंद्र एवं राज्य सरकार की मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। ट्रेड यूनियन काउंसिल के बैनर तले यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। विरोध प्रदर्शन के लिए एक अध्यक्ष मंडल का गठन किया गया। कई वक्ताओं ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार के अवसर लगातार कम किए जा रहे हैं। ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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वक्ताओं ने चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की। उन्होंने सभी मजदूरों को स्थायी रोजगार देने की बात कही। स्कीम वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग उठाई गई। उद्योगों में ठेका प्रथा समाप्त करने और सरकारी विभागों में कार्यरत सभी कुशल कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग की गई।
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मांग-पत्र में सभी श्रमिकों के लिए 42,000 रुपये प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की बात कही गई। मनरेगा को मजबूत कर प्रतिवर्ष 200 दिन रोजगार और कम से कम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी देने की मांग की गई। ट्रेड यूनियन काउंसिल के संयोजक अनिल पवार ने कहा कि मजदूरों की एकता और संघर्ष से उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।