आम आदमी पार्टी के विधायकों की गिरफ्तारी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपने साले की पत्नी का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में बुधवार को आप विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार किया गया और अगले ही दिन आप के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
इस तरह सोमनाथ भारती को लेकर अब तक आप के कुल 11 विधायक गिरफ्तार हो चुके हैं। विधायकों की गिरफ्तारी का ये सिलसिला जून 2015 में आप के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की गिरफ्तारी से शुरु हुआ था। हालांकि फिलहाल इनमें चार विधायक ही जेल में हैं।
सेक्स सीडी मामले में फंसे आप विधायक संदीप कुमार, महिला यौन उत्पीड़न आरोपी अमानतुल्लाह खान, एम्स सुरक्षाकर्मियों से बदसलूकी के आरोप में बृहस्पतिवार को गिरफ्तार हुए सोमनाथ भारती फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। शेष सभी विधायक फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। आइए जानते हैं पिछले 18 महीने में जेल जा चुके आप विधायक और उन पर लगे आरोपों के बारे में...
1. सत्येंद्र जैन - इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक सत्येंद्र जैन की चार कंपनियों पर 17 करोड़ ट्रांसफर करने और इन कंपनियों से चेक प्राप्त करने का आरोप है। आरोप के मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल उन्होंने गैर-कानूनी कालोनियों में प्रापर्टी खरीदने में किया। जैन से संबंधित चार कंपनियां इंडो मेटल इम्पैक्स, अकिंचन डेवल्पर्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रयास इंफो सॉल्यूशन और मगलायतन प्रोजेक्ट्स आईटी विभाग की जांच के घेरे में है।
2. जीतेंद्र सिंह तोमर - सबसे पहले जून 2015 में गिरफ्तार हुए त्री नगर के आप विधायक जीतेंद्र सिंह तोमर। कानून मंत्री हुआ करते थे, कानून की फ़र्ज़ी डिग्री रखने के आरोप में 9 जून 2015 को पुलिस ने घर से गिरफ्तार किया। पहले तो केजरीवाल अपने मंत्री के साथ खड़े रहे लेकिन गिरफ्तारी के बाद अपनी गलती मानी। करीब 44 दिन जेल में रहने के बाद तोमर को कोर्ट ने ज़मानत दी। लेकिन साल भर से ज़्यादा हो चुका है इस मामले में उसके बाद कुछ नहीं हुआ। ना कोई चार्जशीट ना कोई पेशी।
3. मनोज कुमार - 9 जुलाई 2015 को कोंडली के विधायक मनोज कुमार गिरफ्तार हुए। मनोज पर आरोप था कि उन्होंने किसी दूसरे का प्लॉट बेचकर फर्जीवाड़ा किया। 11 दिन बाद कोर्ट ने ज़मानत दी। इस मामले को लगभग एक साल हो गया है। इस दौरान कोर्ट में दो तारीख लगी जिसमें एक में जज साहब नहीं आये। चार्जशीट हो गई है।
4. अखिलेश त्रिपाठी - अखिलेश पर 2013 में एक प्रदर्शन के दौरान दंगा फैलाने का आरोप लगा। दिल्ली पुलिस ने 26 नवम्बर को गिरफ्तार किया और अगले ही दिन 27 नवम्बर को कोर्ट ने जमानत दे दी। कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई कि आपने बिना आधार के आरोप क्यों लगाए? और अखिलेश पर लगे आरोप खारिज कर दिए। यही नहीं बाद में अखिलेश त्रिपाठी पर एक PWD के फ्लैट के गैर कानूनी इस्तेमाल का दबाव बनाने का आरोप लगा जिसको कोर्ट ने खारिज कर दिया।