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वन विभाग ने निजी संगठनों के साथ मिल शुरू किया सर्वे

Sun, 27 Mar 2016 08:59 AM IST
धर्मेंद्र कौशिक/अमर उजाला, फरीदाबाद
धर्मेंद्र कौशिक/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 27 Mar 2016 08:59 AM IST
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to save aravali private firms join hands
जंगल - फोटो : अमर उजाला

अरावली की वादियों का आस्तित्व बचाने के लिए हाथ बढने लगे हैं। वन विभाग ने निजी संगठनों के साथ मिलकर अरावली की खोई हुई पहचान वापस लाने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए संयुक्त सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। इस आधार पर ऐसे स्थान चिन्ह्ति किए जाएंगे जहां खनन हुआ और हरियाली को तबाह किया गया। सर्वे के आधार पर वादियों को बचाने का एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।

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बढ़ते शहरीकरण के प्रभाव के कारण अरावली की सुंदरता पर ग्रहण लगता जा रहा है। पहले तटबंधों के कारण अरावली की पानी से भरी झीलें और हरियाणा पूरे एनसीआर के सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित किया करती थीं। लेकिन इन हसीन वादियों के बीच हुए निर्माणों ने प्राकृतिक स्त्रोतों को तबाह कर दिया है। हरियाली को लीलकर मैदान में तब्दील कर दिया।
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हरियाली पर रहेगा फोकस
वन विभाग का सबसे ज्यादा फोकस अरावली की हरियाली पर है। विभाग ने सेव अरावली संस्था के साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय और आसपास के स्कूलों के छात्रों की मदद से अरावली पर मंडरा रहे  खतरे से निपटने की ठानी है। इसके लिए यहां नर्सरी स्थापित करने की कवायद की जा रही है। छात्रों की पूरी टीम इस काम में जुट गई है।
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वन विभाग देगा तकनीकी मदद
अरावली की खोई सुंदरता को वापस लाने के लिए एक तरफ सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है तो वहीं जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। अरावली सेव संस्था के कैलाश बिधूड़ी ने बताया कि वादियों में नर्सरी बनाने के लिए आसपास के गांवों से खाद एकत्रित की जा रही है। वन विभाग भी इस काम में मदद कर रहा है। विभाग के कर्मचारी पौधरोपण के लिए बीज कलेक्शन का काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा खाद पानी और अन्य जरूरी जानकारियां वॉलेंटियर्स को दी जा रही हैं। तीन हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्राकृतिक सौंदर्य बचाना उद्देश्य
वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि  इस जरिए अरावली के बिगड़ते सौंदर्य  को बचाने का प्रयास किया जाएगा। इसमें अरावली से विलुप्त हो रही पौधों की प्रजातियों को बचाया जाएगा। इसमें खेरी, धोख, रोंज और कृष्ण कदम आदि प्रजातियां खास हैं।  इन्हें फिर से अरावली की वादियों में लगाया जाएगा।


लेकिन प्रशासन क्यों खामोश
अवैध खनन, पेड़ कटाई, पत्थरों की चोरी से अरावली का सीना लगातार छलनी हो रहा है। प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते अरावली की वादियों पर ग्रहण सा लगता जा रहा है। अवैध खनन ने सुंदर वादियों को खतरनाक बना दिया है। गहरे गड्ढे होने के चलते पहाड़ झीलों में तब्दील हो गए हैं, जहां अकसर हादसे होते रहते हैं।

-11000 हेक्टेयर में गुडग़ांव में फैला है अरावली क्षेत्र
-3600 हेक्टेयर फरीदाबाद में फैला है अरावली क्षेत्र

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