हाईकोर्ट ने खारिज की JNU जांच NIA को सौंपने की याचिका
राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से करवाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी जिसकी सुनवाई करते हुए आज कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि यह याचिका जल्दबाजी में दायर की गई है और दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। कोर्ट को यकीन है कि दिल्ली पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी।
याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति बीडी अहमद और आरके गाबा की खंडपीठ के समक्ष दायर याचिका में पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान अदालत परिसर में वकीलों के एक गुट द्वारा छात्रों और मीडियाकर्मियों की पिटाई के मामले की भी न्यायिक जांच की मांग की गई है।
रंजना अग्निहोत्री ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है। ऐसे में मामले की जांच एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया जाए।
वीडियो की प्रतियां पेश करने का निर्देश
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई मंगलवार को तय करते हुए कहा कि मामले की पहले से ही जांच चल रही है और इसे अंतिम निष्कर्ष तक ले जाने की जरूरत है। हालांकि अदालत ने याची से यह भी पूछा कि जब मामले की जांच पुलिस कर रही है, तो जल्दी क्या है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पीठ से कहा कि मीडिया संस्थानों को 9 फरवरी को जेएनयू में हुए कार्यक्रम के वीडियो की प्रतियां पेश करने का निर्देश दिया जाए।
पटियाला हाउस अदालत में सोमवार को वकीलों के एक गुट ने वहां पहुंचे छात्रों व मीडियाकर्मियों की भी पिटाई की है। इसकी न्यायिक जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं ना हों।
जेएनयू शिक्षक यूनियन की हड़ताल आज
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के विरोध में छात्रसंघ की हड़ताल सफल रही। वहीं, कोर्ट में शिक्षकों और छात्रों से मारपीट के विरोध में अब जेएनयू शिक्षक यूनियन ने भी मंगलवार को हड़ताल का एलान किया है। हालांकि कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार हड़ताल नहीं करने की सलाह देते रहे, लेकिन छात्रों के बाद शिक्षकों ने भी बिना बताए हड़ताल की कॉल दे दी। विश्वविद्यालय परिसर से लेकर सड़कों तक दिनभर हंगामा जारी रहा।
जेएनयू में छात्रसंघ ने सोमवार को कक्षाओं के बहिष्कार का एलान किया था, जो पूरी तरह सफल रहा। इसमें शिक्षकों ने भी छात्रों का साथ दिया। कुलपति ऑफिस के बाहर धरने में पर बैठकर केंद्र सरकार और आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी की गई।
इसी बीच छात्रों और शिक्षकों का दल जेएनयू शिक्षक यूनियन के अध्यक्ष प्रो. अजय पटनायक की अध्यक्षता में पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान पहुंचा। कोर्ट परिसर में हुए हंगामे के कारण परिसर का माहौल गरमा गया। शिक्षकों ने परिसर पहुंचकर हड़ताल पर बैठे छात्रों व शिक्षकों को घटना की सूचना देते हुए नाराजगी जाहिर की।
इसे देखते हुए शिक्षकों की सहमति के बाद प्रो. पटनायक ने मंगलवार को कक्षाओं के बहिष्कार की घोषणा कर दी। केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि परिसर और छात्रों को इसी प्रकार प्रताड़ित किया जाता रहा, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
विवि गेट से पुलिस थाने तक सख्त सजा देने की मांग
जेएनयू गेट से लेकर वसंत कुंज पुलिस थाने तक देश विरोधी गतिविधियों में शामिल छात्रों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग को लेकर विरोध जारी रहा।
हिंदू सेना और आम नागरिक विंग ने गेट से लेकर थाने तक का घेराव करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इससे मुनिरका में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। पुलिस को यातायात के साथ प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
हाफिज सईद के दिए पैसे वाले कार्यक्रम में जाते हैं राहुल
केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी प्राची भी जेएनयू परिसर पहुंचीं, लेकिन विश्वविद्यालय सिक्योरिटी ने उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी। उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। साध्वी प्राची ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद द्वारा दिए गए पैसे से प्रायोजित कार्यक्रम में जाते हैं।
साध्वी ने राहुल और सोनिया गांधी को राष्ट्रवाद की परिभाषा बताने को भी कहा। उन्होंने वामपंथी नेता डी राजा की बेटी और जेएनयू छात्रा अपराजिता को गिरफ्तार करने की मांग की, क्योंकि अपराजिता भी कार्यक्रम के वीडियो में मौजूद थी।
प्रकाश करात ने छात्रों को किया संबोधित
साध्वी प्राची और संसद हमले के शहीदों के परिजन को विश्वविद्यालय में जाने की इजाजत नहीं दी गई, लेकिन सोमवार को वामपंथी नेता प्रकाश करात ने परिसर में छात्रों को संबोधित किया।
करात ने बीजेपी, आरएसएस और एबीवीपी पर विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे छात्रों के साथ हैं और कन्हैया की गिरफ्तारी गलत है।
छात्रसंघ के बाद शिक्षकों की हड़ताल से बेहद आहत हूं। हड़ताल के बजाय बातचीत से रास्ता सुलझाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतजार करें।
पुलिस को विश्वविद्यालय ने नहीं, बल्कि पुलिस ने विश्वविद्यालय को एफआईआर दर्ज होने के बाद जानकारी दी। जेएनयू एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है, इसलिए विश्वविद्यालय को अपना काम करने दें।
- प्रो. एम जगदीश कुमार, कुलपति, जेएनयू