{"_id":"66508b126385cf275003c997","slug":"tis-hazari-court-rejects-anticipatory-bail-plea-of-aap-media-coordinator-vikas-kumar-yogi-2024-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi: कोर्ट ने आप मीडिया समन्वयक की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज, कहा- अग्रिम जमानत सुनवाई योग्य नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi: कोर्ट ने आप मीडिया समन्वयक की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज, कहा- अग्रिम जमानत सुनवाई योग्य नहीं
Fri, 24 May 2024 06:12 PM IST
श्याम जी.
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 24 May 2024 06:12 PM IST
सार
आम आदमी पार्टी मीडिया समन्वयक विकास कुमार योगी की अग्रिम जमानत याचिका को तीस हजारी कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि एफआईआर में दर्ज सभी अपराध जमानती हैं, इसलिए अग्रिम जमानत सुनवाई योग्य नहीं है।
विज्ञापन
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तीस हजारी कोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के मीडिया समन्वयक विकास कुमार योगी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की है। अदालत ने कहा कि एफआईआर में दर्ज सभी अपराध जमानती हैं, इसलिए अग्रिम जमानत सुनवाई योग्य नहीं है। यह मामला राउज एवेन्यू स्थित आप कार्यालय में एक महिला पत्रकार और वीडियो पत्रकार पर हमला करने से जुड़ा है।
विज्ञापन
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रामलाल मीना ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसे बनाए रखने योग्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने दिल्ली पुलिस के जवाब और सरकारी वकील की दलीलों पर गौर किया और कहा कि एफआईआर में दर्ज अपराध फिलहाल जमानती हैं। आरोपी ने वकील रजत भारद्वाज के माध्यम से याचिका दायर की। इसमें दलील दी गई कि इस मामले में गिरफ्तारी की वास्तविक आशंका है। शुरुआत में पुलिस ने कहा कि सभी अपराध जमानती हैं, इसलिए याचिका बनाए रखने योग्य नहीं है। यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता महिला पत्रकार का बयान अदालत के समक्ष दर्ज किया जाना है।
विज्ञापन
वकील ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह घटना 20 मई 2024 की है, जिसमें महिला पत्रकार और उसके कैमरामैन की ओर से जबरन घर में घुसकर बदसलूकी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस एफआईआर को दर्ज करने से पहले मुवक्किल ने शिकायत दी थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बजाय उनकेखिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसे न तो अपलोड किया गया और न ही उन्हें कॉपी दी गई। अदालत के निर्देश पर एफआईआर की कॉपी आरोपी को दी गई। दिल्ली पुलिस के जवाब में कहा गया कि दूसरे आरोपी की पहचान के लिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि अगर अपराध जमानती है, तो हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता क्यों है? अभी तक, अपराध जमानती हैं। हमें नहीं पता कि नई धाराएं कब जोड़ी जाएगी। हालांकि, अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने स्पष्ट किया कि यह एक लिखने में त्रुटि थी। बचाव पक्ष ने कहा कि यह लिखने में गलती कैसे हो सकती है। अदालत ने कहा कि अगर अपराध जमानती हैं, तो अग्रिम जमानत बनाए रखने योग्य नहीं है।
अदालत ने कहा कि अभी सभी अपराध जमानती हैं। इसलिए जमानत याचिका विचारणीय नहीं है। इसे विचारणीय न होने के कारण खारिज की जाती है। दो दिन पहले, दिल्ली पुलिस की ओर से आप कार्यकर्ता विकास योगी और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में एक घटना का विवरण है, जिसमें निजी मीडिया संस्थान की एक युवा महिला रिपोर्टर और एक वीडियो पत्रकार पर कथित तौर पर हमला किया गया था। साथ ही, उनका कैमरा तोड़ दिया गया था। इसमें निजी मीडिया संस्थान के दो कर्मचारियों के लिए अपमानजनक भाषा और धमकियों के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें कथित तौर पर 8-10 लोगों ने घेर लिया और इमारत से बाहर खींच लिया।