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अंतरराज्यीय वाहन चोरी गैंग के तीन बदमाश गिरफ्तार, 15 लग्जरी कारें व एक बुलेट बाइक बरामद

Thu, 31 Dec 2020 08:06 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 31 Dec 2020 08:06 PM IST
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Three gangsters arrested for interstate vehicle theft gang 15 luxury cars and one bullet bike recovered
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

पूर्वी जिला की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने लग्जरी कार चुराने वाले अंतरर्राज्यीय गैंग के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना मेरठ का निवासी वसीम है, जो पिछले पांच साल में दिल्ली एनसीआर में पांच सौ से अधिक लग्जरी कारों की चोरी कर उसे जौनपुर और रायपुर में बेच चुका है।

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पुलिस के मुताबिक आरोपी इंश्योरेंस कंपनी से क्षतिग्रस्त कार कागज समेत खरीद लेते थे और फिर उसी मॉडल की कार की चोरी कर उसके चेसिस व इंजन नंबर बदलकर उसे बेच देते थे। बदमाशों के निशानदेही पर पुलिस ने 15 लग्जरी कारें और एक बुलेट बाइक बरामद की है। 
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जिला पुलिस उपायुक्त दीपक यादव ने बताया कि आरोपियों की पहचान नंदनगरी निवासी सतीश कुमार, यूपी के जौनपुर निवासी कुणाल यादव और छत्तीसगढ के रायपुर निवासी रजिकुल्लाह के रूप में हुई है। 12 दिसंबर को शाखा निरीक्षक दिनेश आर्य को सूचना मिली कि गैंग का एक बदमाश सतीश कुमार गाजीपुर डेयरी फार्म होते हुए नोएडा जा रहा है। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर गाजीपुर श्मशान घाट के पास से उसे पकड़ लिया। उसके पास से विवेक विहार इलाके से चुरायी की गयी कार मिली। 
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सतीश ने बताया कि वह वसीम गैंग का सदस्य है जो दिल्ली एनसीआर में वाहनों की चोरी करता है। फिर चोरी की गाडिय़ों को जौनपुर और रायपुर में बेचता है। पुलिस ने उसके निशानदेही पर दिल्ली, मेरठ, जौनपुर, रायपुर और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में दबिश देकर कुणाल यादव और रजिकुल्लाह खान को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से लग्जरी कारें और बुलेट बाइक बरामद कर ली। 

जौनपुर निवासी कुणाल यादव के पिता उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकरी थे। कुणाल वाणिज्य स्नातक है। वर्ष 2018 में कुणाल जल्द पैसा कमाने के लिए गैंग में शामिल हुआ। वह वेब पोर्टल और इंश्योरेंस कंपनियों से स्क्रैप कारों को कागजात सहित खरीद लेता था और उसे वसीम को सौंप देता था। रजिकुल्लाह चोरी के कारों पर क्षतिग्रस्त कार का चेसिस व इंजन नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर उसे बेच देता था। 

पांच साल से चल रहा है गैंग 
जांच में पता चला कि मेरठ का रहने वाला वसीम और रियाज गैंग को चलाता है। पांच छह साल पहले गैंग बनाकर दिल्ली एनसीआर के वाहनों की चोरी कर उसे बेचना शुरू किया। बाद में गैंग में अन्य सदस्य जुड़ते गये। खासकर कुणाल के शामिल होने के बाद उसने इंश्योरेंस कंपनी और कार बेचने वाली वेब पोर्टल से कार खरीदकर उसके चेचिस और रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर चोरी की कार को बेचने लगा। 


गैंग के सदस्य उसी मॉडल की लग्जरी कार को चुराते थे, जिसे वह इंश्योरेंस कंपनी से खरीदते थे। बाद में उन क्षतिग्रस्त कारों को कबाड़ में बेच देते थे। पुलिस के मुताबिक चेसिस और इंजन नंबर को इतनी सफाई से बदलते थे कि ट्रांसपोर्ट और फाइनेंस कंपनी इसे पकड़ नहीं पाती थी। ज्यादातर वाहन को नक्सल प्रभावित इलाके में बेच देते थे। पुलिस के मुताबिक सुभाष चोरी की कार को उसके खरीदार तक पहुंचाने का काम करता था। 

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