{"_id":"5f6bd77dfd4fca645a4582c3","slug":"this-time-air-pollution-in-winter-may-increase-corona-infection","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिंता की बातः इस बार सर्दियों में वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, इटली में हो चुका है ऐसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिंता की बातः इस बार सर्दियों में वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, इटली में हो चुका है ऐसा
Thu, 24 Sep 2020 04:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Sep 2020 04:47 AM IST
विज्ञापन
दिल्ली की सर्दी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्दियों में वायु प्रदूषण से कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ सकता है। देश की राजधानी दिल्ली के डॉक्टर व पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में अक्सर वायु प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। चूंकि कोरोना वायरस और प्रदूषण के बीच संबंध की पुष्टि विज्ञान भी कर चुका है। ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर आने वाले दिनों में सर्दियों के साथ प्रदूषण बढ़ा तो कोरोना संक्रमण का दायरा भी बढ़ सकता है।
विज्ञापन
दरअसल दिल्ली में हर वर्ष दीपावली के आसपास वायु प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है। दिल्ली गैस चैंबर बन जाती है जिसके चलते सांस, अस्थमा और काला दमा जैसे रोगियों को सबसे ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड महामारी में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो यह बहुत ज्यादा खतरनाक कारगर हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इटली में कोरोना वायरस और वायु प्रदूषण के बीच संबंध साबित हो चुका है। अब तक कई चिकित्सीय अध्ययन सामने आ चुके हैं जिनमें यह साबित होता है कि पीएम 2.5 कणों में बढ़ोतरी होने से कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से होगा। इटली के जिन इलाकों में सबसे ज्यादा और गंभीर कोरोना वायरस के मामले मिले हैं वहां पीएम 2.5 का स्तर भी सबसे ज्यादा रहा है।
चीन, हॉवर्ड और इटली के वैज्ञानिकों के कई अध्ययन भी सामने आ चुके हैं। साइंस डायरेक्ट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिक डेनियल फेटोरिनी और फ्रांसेस्को रेगोली ने पीएम 2.5 का स्तर उच्च होने पर उन इलाकों में कोरोना वायरस का फैलाव और उसकी आक्रामकता में भी तेजी पाई है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भी ऐसा ही एक अध्ययन हाल में ही पूरा किया है जिसमें उन इलाकों की कोविड-19 को लेकर तुलना की गई जहां बीते 17 वर्ष में पीएम 2.5 सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। अध्ययन में यह साबित हुआ है कि पीएम 2.5 की वजह से कोरोना मृत्युदर में 15 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
वरिष्ठ श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार का कहना है कि लॉकडाउन में 80 से 100 औसत स्तर देखने को मिला लेकिन 3 मई के बाद से लॉकडाउन को लेकर छूट दी जाने से प्रदूषण का स्तर बढऩे लगा तो मरीजों की संख्या भी अब सामने आ रही है। हालांकि इसमें और स्पष्टता भी जल्द आएगी।
पुणे स्थित पल्मोकेयर रिसर्च एंड एज्युकेशन (प्योर) फाउंडेशन के निदेशक डॉ. संदीप साल्वी का कहना है कि वायु प्रदूषण को लेकर हर साल स्थिति गंभीर बनती है लेकिन इस बार कोरोना की वजह से यह और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। अभी तक के अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि प्रदूषण कोरोना वायरस को बढ़ावा देने में मददगार है।
आश्चर्य : दिल्ली-एनसीआर के 84 फीसदी लोग एक्यूआई से अनजान
बीते जून माह में लंग केयर फाउंडेशन की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली एनसीआर के लोग एक्यूआई से अनजान हैं। इसी साल फरवरी में दिल्ली-एनसीआर के 1757 लोगों पर तैयार की गई। इस सर्वे में 38.80 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया है कि वे पिछले एक वर्ष में छाती की परेशानी को लेकर किसी न किसी डॉक्टर या अस्पताल में सलाह के लिए गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि 83.60 फीसदी लोगों ने एयर क्वालिटी इंडेक्स की जानकारी न होने का हवाला दिया। 57.7 फीसदी लोगों ने माना है कि उनके शहर की हवा प्रदूषित या ज्यादा प्रदूषित है।
दोहरी मार करता है प्रदूषण
विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण की वजह से दोहरी मार देखने को मिलती है। यह श्वसन तंत्र को प्रभावित करने के साथ साथ प्रतिरोधक प्रणाली को भी प्रभावित करता है। यह कहना है सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विशेषज्ञ सुनील दहिया का। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण अत्यधिक होने के पीछे सिर्फ पराली का जलना ही मुख्य कारण नहीं हैं। सरकार को वायु गुणवता में गिरावट को रोकने के लिए सर्दियों के दौरान कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों को बंद करने का आदेश देना चाहिए।