ये अधिकारी मोदी से कहना चाहता है मन की बात
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उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एम्स में हुए भ्रष्टाचार और लंबित पड़े मामलों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट अथवा हाईकोर्ट के सेवारत न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच आयोग बनाने की मांग की है।
एम्स में हुए भ्रष्टाचार और जांच रिपोर्ट कार्रवाई के इंतजार में पिछले एक वर्ष से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में लंबित पड़ी है। जांच रिपोर्ट को लंबित रखने में किसकी भूमिका है इसकी जांच के लिए आयोग बनाने की मांग संजीव की ओर से रखी गई है।
संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति और प्रधानमंत्री के न खाऊंगा न खाने दूंगा की नीति को सही साबित किया जा सके। पत्र में कहा गया है कि यदि इस संदर्भ में जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों का सरकार के उपरोक्त स्लोगन से विश्वास उठ जाएगा।
आपसे मिलने का समय मांगा है ताकि अपने मन की बात सामने रख सकूं
संजीव ने पत्र में लिखा है कि प्रधानमंत्री जी मैंने रेडियो पर आपकी सभी मन की बात कार्यक्रम को ध्यान से सुना है लेकिन किसी में यह नहीं सुना कि कैसे महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं को लागू किया जाएगा, जब ईमानदार अधिकारी नहीं होंगे। लिहाजा पत्र लिख कर व्यक्तिगत तौर पर आपसे मिलने का समय मांगा है ताकि अपने मन की बात सामने रख सकें।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि वर्तमान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री बनने के पहले से ही एम्स में भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रही जांच और कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए पत्र लिख रहे थे और बाद में उन्हें ही स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया।
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ अनुमोदित विभागीय कार्रवाई पिछले एक वर्ष से मंत्रालय में लंबित है। यह अधिकारी स्वास्थ्य मंत्री के बेहद करीबी हैं। पिछले एक वर्ष से एम्स के अंदर हुए एक भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए न तो सीबीआई और न ही सीवीसी के पास भेजी गई।
पीएमएनआरएफ ने स्वीकार की संजीव की दान राशि
रमन मैग्सेसे अवॉर्ड में मिली 14 लाख रुपये से अधिक की राशि संजीव चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान कर दिया और इसे स्वीकार कर लिया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अंडर सेक्रेट्री पीके बाली ने प्रधानमंत्री की ओर से इस नेक कार्य के लिए संजीव चतुर्वेदी को बधाई दी है और विशेष दूत के सहारे इसकी लिखित जानकारी उनके सरकारी आवास भिजवाई है।
इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अलग-अलग कारणों से इस राशि को लेने से अस्वीकार कर दिया था।