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इस गांव में न रात में आएगी बारात और न बजेगा डीजे

Thu, 18 Feb 2016 05:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 18 Feb 2016 05:39 PM IST
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thetre will be no marriage ceremony in night time in navada village of faridabad, haryana

नवादा गांव में अब न रात में बारात आएगी और न ही किसी शादी-ब्याह में डीजे की आवाज सुनाई नहीं देगी। शादियों के दौरान गांव के खराब इतिहास को ध्यान में रखकर ही पंचायत ने यह निर्णय लिया है। पंचायत का मानना है कि रात की बारात और डीजे पर प्रतिबंध लगाने से गांव की शादियों में शांतिपूर्ण माहौल बना रहेगा।

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हाल में गांव में बड़े-बुजुर्गों पंचायत कर शादी-ब्याह में बेवजह से खर्चों और दिखावे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने को लेकर अपने-अपने विचार रखे। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भविष्य में होने वाली शादियों में डीजे नहीं बजाया जाएगा। साथ ही लोगों से रात की जगह दिन में ही शादी का आयोजन करने की अपील की गई।
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इसके अलावा भात-छोछिक में कम से कम लोग जाएंगे। शादियों में दहेज की सूची नहीं पढ़ी जाएगी। दहेज की गाड़ी टैंट में नहीं खड़ी होगी, शादियों में बड़े क्षेत्र में टैंट, आतिशबाजी व बैंड पर बेवजह का खर्च नहीं होगा। लगन-सगाई, शादी या रिसेप्शन में से एक बड़ा कार्यक्रम होगा आदि अनिवार्य रहेगा।
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सरपंच बेगराज ने बताया कि 15 फरवरी को हुई बैठक में यह सब निर्णय लिए गए हैं। इसके अलावा 24 फरवरी को फाइनल बैठक होगी। इसमें पहली बैठक में लिए गए सभी महत्वपूर्ण निर्णयों का शपथपत्र तैयार करके ग्रामीणों से शपथ दिलवाई जाएगी।

निर्णय न माना तो कार्यक्रम में नहीं होंगे बुजुर्ग
वेगनाथ नागर ने बताया कि नवादा गांव में गुर्जर समाज है। गांव की भलाई को देखते हुए पंचायत की सर्वसम्मति से लिए गए सभी निर्णय ग्रामीणों को मानने होंगे। इसके अलावा जो भी इनके विरुद्ध रहेगा, उसके शादी-ब्याह या किसी भी कार्यक्रम में गांव के बड़े-बुजुर्ग शामिल नहीं होंगे। बुजुर्ग उस कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे। यह उनके लिए सबसे बड़ी सजा होगी।

गांव का इतिहास रहा खराब
बताते हैं कि नवादा गांव में जितनी भी बारात आई हो या गई हो, उसमें कोई न कोई बड़ा बवाल मचा है। डीजे पर लड़ाई-झगड़ा तो यहां आम बात हैं। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए रात की बारात व डीजे न बजाने का निर्णय पंचायत ने लिया है। वेगराज दूसरी बार गांव के सरपंच बने हैं। उन्होंने बताया कि पिछली पंचायत में भी डीजे न बजाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इस पर अमल नहीं किया था, लेकिन इस बार सख्ती से डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया है।


एकता का मिसाल है नवादा गांव
500 वर्ष पुराना नवादा गांव एकता के लिए मिसाल है। गांव में आज तीन से चार हजार की आबादी है। गुर्जर समाज के अलावा यहां बहुत सी अनुसूचित जातियां बसी हुई हैं। सभी के बीच जात-पात का कोई भेदभाव नहीं है। इसके अलावा निम्न जातियों के लोगों पर जब भी कोई संकट आता है तो पूरा गांव उनके साथ होता है।

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