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बिना विभाग के CM के सामने ये हैं 7 चुनौतियां

Fri, 20 Feb 2015 08:53 AM IST
Updated Fri, 20 Feb 2015 08:53 AM IST
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These seven challenges to the without dept CM

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बेशक अपने पास कोई विभाग नहीं रखा है, लेकिन वादे और नए सरकारी आदेश से कई चुनौतियों का सामना उन्हें करना पड़ेगा। कई मामले पिछले 10-15 सालों से लंबित चल रहे हैं। सरकार के 4 दिन के कार्यकाल में जारी आदेश के साथ पुरानी दिक्कतें केजरीवाल के लिए चुनौती बन सकती हैं।

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चुनौती नंबर-एक
अरविंद केजरीवाल ने शपथ वाले दिन भाषण में व्यापारियों पर रेड नहीं मारने की घोषणा की और ईमानदारी से टैक्स मांगा। स्वयं मूल्यांकन करके टैक्स की व्यवस्था पहले से भी है, ऐसे में बिना रेड मारे टैक्स बढ़ाने की चुनौती से निपटना होगा। सरकार का 60 फीसदी खर्च वैट से ही आता है।
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दूसरी तरफ निर्माण न तोड़ने का फरमान जारी

These seven challenges to the without dept CM

दो
सरकार ने अवैध निर्माण पकड़ने के लिए कैमरों के मेगा प्रोजेक्ट पर बड़ी राशि खर्च की है, तो दूसरी तरफ निर्माण न तोड़ने का फरमान जारी किया है। झुग्गी मुक्त शहर की घोषणा से इसकी गारंटी कैसे मिलेगी कि नई झुग्गी मिलीभगत से नहीं डलेगी।

तीन
अनुबंधित कर्मचारियों को नहीं हटाने के फैसले में भी एजेंसियों के सामने चुनौती आएगी, क्योंकि तीन महीना पूरा होने से पहले एक ब्रेक देकर पक्का करने से बचते रहे हैं। हर विभाग में कर्मचारियों की कमी है और पूरी दिल्ली में 1.02 लाख अनुबंधित कर्मचारी हैं।

चार
शहरी विकास विभाग ने नया आदेश दिया है कि रेहड़ी-पटरी, हॉकर्स को रजिस्ट्रेशन तक नहीं हटाने को कहा गया है। इससे सड़कों पर इनकी संख्या बढ़नी तय मानी जा रही है। हालांकि आदेश में नए हॉकरों को आने से रोकने को कहा गया है, लेकिन यह जवाबदेही केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ाएंगी।

पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की पूरी कसरत

These seven challenges to the without dept CM

पांच
मुख्यमंत्री होने के नाते दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की पूरी कसरत करनी पड़ेगी, हालांकि जितेंद्र तोमर को गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही लोकपाल कानून और महिला सुरक्षा दल का मामला इन्हें ही सुलझाना होगा।

छह
मुख्यमंत्री ने बेशक इस बार जनता दरबार की घोषणा नहीं की है, लेकिन खुद अरविंद केजरीवाल कौशाम्बी और बाकी मंत्री अपने-अपने घर पर जनता दरबार लगा रहे हैं। जब केजरीवाल दिल्ली के घर में आएंगे तो भीड़ से निपटना किसी चुनौती से कम नहीं होगी। क्योंकि राष्ट्रपति शासनकाल में जनता दरबार लगाने पर अमल बंद हो गया है।

सात
दिल्ली सरकार के पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। इस नाते 20 हजार लीटर तक फ्री पाने देने का वादा पूरा करना है तो पानी की लीकेज और बिल में अथाह सर्विस चार्ज परेशान करेगा।

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