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Delhi NCR News: पूर्व चिकित्सा इतिहास छिपाना पड़ा भारी, अदालत ने आईएमए प्रवेश की याचिका खरिज की
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- अदालत ने कहा अभ्यर्थी में एनडीए से चिकित्सा आधार पर निकल जाने के अपने पूर्व इतिहास को छुपाया है
- याचिकाकर्ता वर्ष 2025 के सीड्स परीक्षा में चयनित हुए थे
लेकिन इससे पहले व्हाट्सएप 2021 में उन्हें एनडीए से स्वास्थ्य के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा के एक अभ्यर्थी की भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में प्रवेश संबंधी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि अभ्यर्थी ने नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) से चिकित्सा आधार पर निकाले जाने के अपने पूर्व इतिहास को जानबूझकर छिपाया, जो भौतिक तथ्य का दमन है। न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अमित शर्मा शामिल थे, ने 26 अगस्त को दिए गए फैसले में तरुण कुमार त्रिपाठी की याचिका खारिज कर दी। त्रिपाठी सीडीएस-II 2025 परीक्षा में मेरिट रैंक 111 हासिल कर आईएमए-161 कोर्स में प्रवेश चाहते थे। त्रिपाठी इससे पहले अप्रैल 2021 में एनडीए के 145वें कोर्स में भारतीय सेना कैडेट के रूप में शामिल हुए थे। चौथे टर्म में क्रॉस-कंट्री दौड़ के दौरान उनके बाएं फीमर में स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें चिकित्सा आधार पर वापस लेने की सिफारिश की, जिसे फरवरी 2024 में मंजूरी मिल गई। उन्हें भविष्य की सैन्य सेवा के लिए स्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया था।
न्यायालय ने पाया कि अभ्यर्थी ने आवेदन पत्र भरते समय इस चोट और एनडीए से चिकित्सा वापसी का उल्लेख नहीं किया। खंडपीठ ने कहा कि सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए उम्मीदवारों को अपना पूरा चिकित्सा इतिहास ईमानदारी से बताना आवश्यक है, ताकि उनकी निरंतर फिटनेस का सही आकलन हो सके। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बाद में तटरक्षक बल या अन्य चिकित्सा प्रमाणपत्रों से यह कमी पूरी नहीं हो सकती। फैसले में कहा गया कि आवेदन में गलत घोषणा और भौतिक तथ्य छिपाना प्रवेश के लिए अयोग्य बनाता है।
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- याचिकाकर्ता वर्ष 2025 के सीड्स परीक्षा में चयनित हुए थे
लेकिन इससे पहले व्हाट्सएप 2021 में उन्हें एनडीए से स्वास्थ्य के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा के एक अभ्यर्थी की भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में प्रवेश संबंधी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि अभ्यर्थी ने नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) से चिकित्सा आधार पर निकाले जाने के अपने पूर्व इतिहास को जानबूझकर छिपाया, जो भौतिक तथ्य का दमन है। न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अमित शर्मा शामिल थे, ने 26 अगस्त को दिए गए फैसले में तरुण कुमार त्रिपाठी की याचिका खारिज कर दी। त्रिपाठी सीडीएस-II 2025 परीक्षा में मेरिट रैंक 111 हासिल कर आईएमए-161 कोर्स में प्रवेश चाहते थे। त्रिपाठी इससे पहले अप्रैल 2021 में एनडीए के 145वें कोर्स में भारतीय सेना कैडेट के रूप में शामिल हुए थे। चौथे टर्म में क्रॉस-कंट्री दौड़ के दौरान उनके बाएं फीमर में स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें चिकित्सा आधार पर वापस लेने की सिफारिश की, जिसे फरवरी 2024 में मंजूरी मिल गई। उन्हें भविष्य की सैन्य सेवा के लिए स्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया था।
न्यायालय ने पाया कि अभ्यर्थी ने आवेदन पत्र भरते समय इस चोट और एनडीए से चिकित्सा वापसी का उल्लेख नहीं किया। खंडपीठ ने कहा कि सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए उम्मीदवारों को अपना पूरा चिकित्सा इतिहास ईमानदारी से बताना आवश्यक है, ताकि उनकी निरंतर फिटनेस का सही आकलन हो सके। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बाद में तटरक्षक बल या अन्य चिकित्सा प्रमाणपत्रों से यह कमी पूरी नहीं हो सकती। फैसले में कहा गया कि आवेदन में गलत घोषणा और भौतिक तथ्य छिपाना प्रवेश के लिए अयोग्य बनाता है।
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